Sunday, July 31, 2022

गजब

बड़ा गजब खेला चल रहा है ,
जिसे मौका मिले वो रेल रहा है ,
जहाँ देखो वहाँ अजब शोर हो रहा है ,
सियारों की बारात में शेर नाच रहा है ,
छीना झपटी का खुला खेल चल रहा है ,
बाजार इश्तहारों से अटा पड़ा है ,
नकली सामानों का कारोबार धड़ल्ले से चल रहा है ,
असली नेता , नकली नेता सब गड़बड़झाला है ,
घरों से नोटों का अम्बार निकल रहा है ,
सामाजिकता सिमट कर एक टुनटुने में आ गई ,
सोशल मीडिया का हर जगह बवाल चल रहा है ,
जनता की हाय कौन सुने यहाँ ,
कोई "भक्त " , कोई " चमचा " में तुल रहा है ,
असमंजस ही असमंजस है हर जगह ,
बस वो चौराहे पर बैठा पागल - दिल खोलकर हँस रहा है।   

Saturday, July 16, 2022

हवा का एक झोंका

आया हवा का एक झोंका ,

ज़िन्दगी किताब को झकझोर गया ,

एक एक पन्ना जैसे ,

खुदबखुद खुलने लगा।

 

किसी पन्ने में सिसकियाँ ,

किसी पन्ने से खुशियाँ झरने लगी ,

कही से बचपन झाँक रहा ,

कहीं लड़कपन ने अंगड़ाई ली।

 

कही दोस्ती की कसमे खाई ,

किसी कोने पर वो पहले प्यार की अंगड़ाई ,

कुछ फूल जो सूख चुके थे उसकी निशानी ,

किसी पन्ने पर  जुदाई।

 

मुड़ा हुआ वो पेज भी आया ,

जिस पर लिखी थी एक अधूरी कहानी ,

लौटकर आऊंगा कभी मुड़कर ,

सोचा था पूरी करूँगा वो कहानी।

 

साल दर साल वो लिखावट में अंतर ,

सपनो के पीछे हकीकत का वो अस्तर ,

कुछ पाने की खातिर कुछ छूटने का मंजर ,

                                                      उस हवा ने टटोल दिया मेरा मन मंतर।