Sunday, December 17, 2023

चूहे -बिल्ली का खेल

  

आजकल समाज में गजब ,

चूहे -बिल्ली के खेल चल रहा है ,

मजे की बात - कौन चूहा है ,

और कौन बिल्ली ?

किसी को समझ नहीं आ रहा है ,

जो किसी के लिए चूहा है ,

वो किसी के लिए बिल्ली है ,

सरपट हर कोई ,

बेलगाम भाग रहा है ,

चूहे के लिए चारा हर जगह बिखरा पड़ा है ,

अगर जाए तो फिर बिल्ली से खतरा बड़ा है ,

बिल्ली का अहम बहुत बड़ा है,

आयेगा तो मेरे ही हत्थे ,

चुपचाप प्रतीक्षा में खड़ा है ,

चूहे के पास भी छठी इन्द्रिय है ,

हर बार गच्चा देने में उसने ,

भी अब पी एच डी कर ली है ,

बिल्ली को झाँसा देने के लिये ,

उसने भी एक वर्चुअल दुनिया गढ़ ली है ,

अब खेल डिजिटल हो गया है ,

बिल्ली हर बार ट्रोल हो जाती है ,

थोड़े दिन खेल से आउट होकर ,

नए अवतार में आती है ,

चूहे तब तक खा पीकर मोटे हो जाते है ,

बिल्ली मौका देखकर झपटा मारती है ,

बिना डकार लिये चूहे को पचा लेती है,

आजकल समाज में गजब ,

चूहे -बिल्ली के खेल चल रहा है ,

मजे की बात - कौन चूहा है ,

और कौन बिल्ली ?

किसी को समझ नहीं आ रहा है ।

 

Saturday, December 9, 2023

समाज

 

समाज को ,

आज खतरा सिर्फ ,

बुरे लोगों से नहीं है ,

उससे ज्यादा खतरा ,

उन अच्छे लोगों से है ,

जो अच्छेपन की आड़ में ,

अंदर से बुरे है ,

और अपनी स्वार्थसिद्धि के लिये ,

इस लबादे के नीचे विष लिये है ,

न ये पहचाने जा रहे है ,

और न इनके पास बुरे होने का ,

कोई ठप्पा है,

धीरे -धीरे समाज को ,

यही लोग दीमक की तरह ,

चट रहे है ,

जो वाकई अच्छे है ,

वो खामोश है ,

और जो घोषित बुरे है ,

अच्छे दिन उन्ही के चल रहे है,

बाकी सब एक दूसरे का मुँह ,

जानबूझकर नहीं तक रहे है ,

कई वजहें सामाजिक है ,

और कई व्यक्तिगत है ,

समाज धीरे -धीरे ढल ही रहा है ,

चीजों को आत्मसात कर रहा है ,

और फिर शायद इक दिन ,

यही समाज आदर्श हो जायेगा।