खुल रहा पिटारा एप्सटीन का ,
बेनकाब हो रहे चेहरे सारे ,
सफेदपोश चेहरों के नकाब,
खुल रहे है धीरे -धीरे।
क्या राजनेता , क्या अभिनेता ,
क्या व्यापारी , क्या खिलाडी ,
एप्सटीन के लिटिल सेंट जेम्स द्वीप में ,
एक ही हमाम में नंगे सारे।
सत्ता के मद में चूर ,
दौलत के नशे में डूब ,
अय्याशी के अड्डे में ,
भूले सब कायदे -कानून।
परत दर परत खुल रही ,
उड़ रही अब सब धूल ,
एप्सटीन तुम माहिर निकले ,
दे गये सबको घाव नासूर।
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