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Wednesday, February 14, 2018

राधा कृष्ण



कुछ तो बोल राधा  ,
श्याम तेरा क्यों न हुआ ,
तू उसके प्रेम में पगली बनी ,
श्याम किसी और का क्यों हुआ।

सुन सखी , प्रेम तो त्याग है
ये देह का नहीं , दिलो का राग है ,
मिल जाते कान्हा मुझे तो ,
फिर हमारा प्रेम कैसे अमर होता।

राधा कृष्ण तो एक है ,
और सदा एक ही रहेंगे ,
एक दूजे के बिना वो अधूरे है , 
एहसास है प्रेम , 
जो शब्दों से बयां मुश्किल से होता है , 
रूह से जुड़े होने का जज्बात है ये , 
बस दिल ही दिल बयां होता है।  

प्रेम की पराकाष्ठा ये है सखी , 
उसकी हर सांस में प्रेमी का , 
स्वर होता है , 
दैविक है प्यार तो , 
ये शारीरिक सीमाओं में नहीं बंधा होता है।  

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