आओ बसंत , छा जाओ बसंत
,
कुम्हला रही कपोलों में
प्राण भरो बसंत ,
रूखी हवाओं में ताप भरो
बसंत ,
निर्मोही मन में बासन्ती
रंग भरो बसंत।
सुप्त पड़ी धरा को उष्मित
करो बसंत ,
सूखी डालियों को फिर
लहलहाओ बसंत ,
कलरव का संगीत बजाओ बसंत
,
मुरझाये से मन में फाग
भरो बसंत।
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