Wednesday, February 11, 2026

बसंत

 


 

आओ बसंत , छा जाओ बसंत ,

कुम्हला रही कपोलों में प्राण भरो बसंत ,

रूखी हवाओं में ताप भरो बसंत ,

निर्मोही मन में बासन्ती रंग भरो बसंत। 

 

सुप्त पड़ी धरा को उष्मित करो बसंत ,

सूखी डालियों को फिर लहलहाओ बसंत ,

कलरव का संगीत बजाओ बसंत ,

मुरझाये से मन में फाग भरो बसंत। 

 

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