Saturday, March 14, 2026

अगर-मगर


 अगर-मगर ने बस एक “काश” छोड़ा,

इधर-उधर ने हर बार “चौराहे” पर पटका,

कहानी बस ये चल रही है "सफ़र-ए-ज़िंदगी" की,

वक़्त गुज़र रहा है, इच्छाओं का रोज़ नया सिला मिला।

 

कभी दिल ने चाहा आसमान छू लेना,

कभी हालातों ने ज़मीं से बाँधे रखा,

हम चलते रहे ख़्वाबों के सहारे मगर,

किस्मत ने हर मोड़ पर इम्तिहान सख़्त रखा।

 

 

उम्मीद का दिया बुझने न दिया,

रातों में भी ख़्वाबों का कारवाँ चला,

चलते रहे राहें -ऐ -ज़िन्दगी असमंजस में ,

जो मिला , जैसा मिला - किस्मत समझ अपना लिया। 

 

बेशक , हो सकता था सफर और बेहतर ,

नहीं होते अगर -मगर , इधर -उधर ,

जो चल रहा है अब वो भी गजब है ,

तुलना औरों से करूँ तो नहीं है कमतर। 

 


1 comment:

  1. शानदार , जबरदस्त।

    ReplyDelete