Tuesday, May 19, 2026

शहर

 

किससे मिले इस शहर में ,

हर कोई तो यहाँ व्यस्त है ,

किससे पूछे हाल चाल शहर में ,

यहाँ हर शख्श  परेशान सा है।

 

न जाने कैसी आबो हवा है यहाँ ,

जिस से मिलो, उसकी हालत ख़राब है ,

फुर्सत यहाँ सलीके से खाने तक की नहीं ,

सबको यहाँ जल्दी की आदत क्यों है।

 

हवा तक खरीदी जा रही है यहाँ ,

हर नुक्कड़ पर एक अस्पताल है ,

नुमाइशो के बाजार पर सबकी नजर है,

टटोलते है जेब जब , वह खाली है।

 

इस शहर में रिश्तों की भीड़ बहुत,

पर दिल से दिल का मिलना मुश्किल है,

चेहरों पर मुस्कानें चिपकी हुई हैं,

अंदर हर इंसान थोड़ा घायल है।

 

सड़कों पर रौशनियाँ जगमग हैं,

पर आँखों में अंधेरा पलता है,

ऊँची इमारत छूती हैं बादल को,

पर आदमी भीतर से बिखरता है।

Tuesday, May 5, 2026

मर्ज़ी

 

जो है , सब ईश्वर की मर्ज़ी ,

जैसा है , सब ईश्वर की मर्ज़ी ,

जो होगा ,वो ईश्वर की मर्ज़ी ,

चलते रहना ही बस मेरी मर्ज़ी।

 

ख़ुशी भी उसकी मर्ज़ी ,

दर्द भी उसकी मर्ज़ी ,

हार -जीत भी उसकी मर्ज़ी ,

चलते रहना , बस मेरी मर्ज़ी।

 

साँसे ,उसकी मर्ज़ी ,

हवायें , उसकी मर्ज़ी ,

दिन रात ,उसकी मर्ज़ी ,

बस चलते रहना , मेरी मर्ज़ी।