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Monday, March 29, 2010

आओ नयी शुरुवात करे.....................

कितनी बार दिल ने चाहा बदल लेते हैं चलो राह, उठे कदम न जाने कितनी बार थम गए !
शायद इसलिए हम जहा थे वही रह गए,हमारे साथी जिन्होंने हिम्मत की- कहाँ थे कहाँ पहुच गए.

शिकवा उनकी तरक्की से नहीं हैं, हम दिल से काम लिए और वो दिमाग की कहे सुनते गए.
उन्होंने हर अवसर को पहचाना , हम अवसर गवाते बदते रहें.

अब भी दिमाग कहता हैं, वक़्त अभी गुजरा नहीं .
जो बीत गया उसको भुला, चुन अभी भी अपनी राह.

और सरपट उस पर भाग,राह पकड़ ही लेगा एक दिन,
उस दिन होगा तुझको खुद पर नाज़.

हम सबकी यही कहानी हैं,आपबीती फिर सुनानी हैं.
क्यूँ न हम मिसाल बने, अपनी नज़रों में ही महान बने.

खुद फक्र कर सके अपनी ज़िन्दगी पर, अपनी कहानी खुद क्यूँ न लिखे.
आओ की अब भी वक़्त ठहरा हैं हमारे लिए, एक नयी शुरुवात करे.

भ्रमो के मायाजाल को काटे , खुद पर यकीन करे.
चुने अपनी राह वही , जो खुद को लगे सबसे सही.

1 comment:

  1. बहुत ही अच्‍छी कविता लिखी है
    आपने काबिलेतारीफ बेहतरीन


    SANJAY KUMAR
    HARYANA
    http://sanjaybhaskar.blogspot.com

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