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Friday, April 7, 2017

लेखन यात्रा



निकल पड़ा हूँ लेखन यात्रा में ,
लिए शब्दों का पिटारा ,
भावनाओ की स्याही हैं ,
कलम ही मेरा सहारा।

लिखूंगा , और बेबाक लिखूंगा ,
गद्य लिखूंगा -पद्य लिखूंगा ,
कभी कल्पनाओ में गोते ,
और कभी सच को धार दूँगा।

कभी आपको हँसाऊंगा ,
कभी शायद पलके नम करूँगा ,
यायावर बनकर अब ,
ज़िन्दगी के और नजदीक पहुँचूंगा।

मिलेंगे अपने जैसे मुझे और कई ,
शब्दों का जाल बुनता रहूँगा  ,
जीवन के इस नए सफर में ,
शायद ज़िन्दगी का सार मिलेगा।

अच्छा लगे तो हौंसला देते रहिएगा ,
बुरा लगे तो भी बताइयेगा ,
इस यात्रा में हो सके तो ,
मेरा साथ देते रहियेगा।  

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