Amazon-Buy the products

Friday, January 19, 2018

लहर ( व्यंग्य )

बड़ी लहर है , 
कौन, किससे यहाँ कमतर है ,
मौके की तलाश में सब , 
न जाने कौन , कब सिकंदर है।  

बड़ी लहर है , 
सबके एक कीड़ा अंदर है , 
बिना हाथ पैर चलाये , 
काम हो जाये तो बेहतर है।  

बड़ी लहर है , 
सब नेता बनने पर तुले है , 
कोई आगे बढ़ जाये गर , 
उसकी टाँग खींचने में सब अड़े है।  

बड़ी लहर है , 
रोज़ नए नए मुद्दे उछलते है , 
बिना एक भी सुलझायें , 
सत्ता सत्ता खेल रहे है।  

बड़ी लहर है , 
महिलाएं सुरक्षित नहीं है , 
बच्चो का भविष्य खतरे में , 
उन्नति के आँकड़े रोज़ पेश हो रहे है।  

बड़ी लहर है , 
प्रदूषण की हर तरफ मार है , 
खुद की रक्षा के लिए , 
खुदा की सर्वश्रेष्ठ रचना एटम बम लिए तैयार है।  

No comments:

Post a Comment