दूसरों के लिए होते
है उसूल ,
अपने लिये लगते है
फ़िजूल ,
दुनिया में सामर्थ्यवान
ही सब कुछ है ,
नैतिकता है इनके लिये
धूल।
कटु सत्य तो ये है
ज़माने का ,
पैसे और रुतबे का
ही है खेल सारा ,
जपते रहो मानवता का
पाठ बराबर ,
वो आयेंगे और बदल
देंगे खेल सारा।
खेल सारा इस पार और
उस पार का है ,
इस पार ज्यादा है
, उस पार कम है ,
षड़यंत्र ऐसा , जिसकी
कोई थाह नहीं ,
कम वालों का ज्यादा
पर नियंत्रण सारा है।
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