Wednesday, January 7, 2026

उसूल

  

दूसरों के लिए होते है उसूल ,

अपने लिये लगते है फ़िजूल ,

दुनिया में सामर्थ्यवान ही सब कुछ है ,

नैतिकता है इनके लिये धूल।

 

कटु सत्य तो ये है ज़माने का ,

पैसे और रुतबे का ही है खेल सारा ,

जपते रहो मानवता का पाठ बराबर ,

वो आयेंगे और बदल देंगे खेल सारा।

 

खेल सारा इस पार और उस पार का है ,

इस पार ज्यादा है , उस पार कम है ,

षड़यंत्र ऐसा , जिसकी कोई थाह नहीं ,

कम वालों का ज्यादा पर नियंत्रण सारा है।

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