Amazon-Buy the products

Friday, May 5, 2017

शब्द

शब्द -
प्यार भी हैं - तकरार भी,
शांति  भी हैं  संहार भी,  
आदर भी हैं - अपमान भी।

शब्द ,
गति भी है - ठहराव भी,  
उजाला भी है - अंधकार भी ,
भरोसा भी हैं , विश्वासघात भी।

शब्द -
ममता भी हैं - दुत्कार भी ,
प्रेरणा  भी हैं - तिरस्कार भी,
नम्रता भी हैं -  घमंड भी।

शब्द -
मित्र भी हैं- शत्रु भी,
मरहम भी है - घाव भी,
आकाश भी हैं - पाताल भी।

शुरू होती हैं बात इन्ही शब्दों से , फिर अंजाम तक पहुँचती हैं।
रिश्तो के बनने और बिगड़ने की इन्ही शब्दों से शुरुवात होती हैं।।

शब्दों की महिमा अपरम्पार हैं।  
कृष्ण बोले तो 'गीता' और दुर्योधन बोले तो 'महाभारत' हो जाती  हैं ।।   

No comments:

Post a Comment