Tuesday, September 14, 2021

धार

तुम जब आओगी मेरे पहाड़ ,

मैं तुम्हें उस धार में ले जाऊँगा ,

जहाँ से दिखता है हिमालय ,

और उससे आती इक नदी ,

दृश्य कितने नयनाभिराम ,

उस धार के ढुंग पर ,

बैठकर हम करेंगे ढेरों बात ,

मैं तुम्हे दूँगा इक बुराँश का फूल ,

जुड़े में गुँथने के लिये नहीं ,

खाने के लिये ,

हाँ , खाया भी जाता है ये फूल ,

ठण्डी हवाएँ बहती है उस धार में ,

उस धार में इक मंदिर भी है

कहते है - हर मन्नत पूरी होती है वहाँ ,

मगर , मुझे मत माँगना उनसे ,

माँगना अपनी खुशियाँ ,

और फिर उतर जाना ,

चली जाना समेटे यादों को ,

कभी मन करेगा तो ,

आ जाना - मैं वही मिलूँगा,

उस धार के पास ,

निहारते श्वेत धवल हिमकिरीट ,

और ऊपर मेरे नीला आकाश। 

 

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कुमाउँनी शब्द

धार - पहाड़ की चोटी

ढुंग - बड़ा पत्थर



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