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Monday, September 21, 2009

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

ज़िन्दगी की इस दौड़ में मैं जीना भूल सा गया था ,

फिर मुझे खुदा ने बेटी का वरदान दे दिया ,

अब मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं !

बार बार गिरकर उसका फिर से अपने को संभालना ,

फिर से उठने की जिद अपने खुद को खड़े करना ,

उठ के फिर से खुशियाँ मनाना, बिना बात के यु ही मुस्करा देना,

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

उसका वो बेपरवाह अठखेलिया करना, फिर उसका हर बात से बेखबर सोना,

सुबह सबसे पहले जग कर सबको अपने शोर से जगाना,

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

वो मेरा कभी उसको गुस्सा दिखाना, उसका उस गुस्से से रोना,

फिर थोडी देर मैं फिर से मुझसे चिपकना,

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

उसका हर चीज़ पर लपकना , हर चीज़ को टटोलना ,

किसी भी अजनबी से पहले तो डरना,

फिर प्यार से हसना,

मेरी बिटिया मुझे जीना सिखाती हैं.

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