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Monday, September 14, 2009

Kuch Pankitiya

खुशियों को समेट मुट्ठी में , दुखों को दूर भगा ,

रेत की तरह फिसल रही ज़िन्दगी को ,हर पल तू जिए जा.

आये कितने ही दुखो के पल, बस तू हसे जा,

ये इम्तिहान हैं तेरा ,बस तू हर हाल मैं जीए जा.

कर भरोसा खुद पे इतना,हिम्मत को अपनी ताकत बना .

कुवत हैं तुझमे दुनिया बदलने की, खुद को बस इतना समझा .

नहीं रुक सकते तेरे रास्ते , अपनी एक पहचान बना.

कर दुनिया को मुट्ठी में, बस तू अपनी धून में जिए जा.

आये कोई बाधा , हस के उसको गले लगा,

मुड़कर मत देख फिर,बस चले चले जा.

ये ज़िन्दगी एक बार मिली हैं, मत तू इसको गवा ,

ज़िन्दगी में एक राह चुन , बस चले चले जा.

लक्ष्य बना अपना कोई, उसकी धून में रम जा.

दुनिया चाहे कुछ भी कहे , अपने मन को मना .

सुन सबकी कर अपनी, अपनी मंजिल को पा.

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