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Saturday, June 9, 2018

कशमकश

माथे पर चिंताओं की लकीरें  क्यों है ?
चेहरे पर ये मायूसी सी क्यों है ?
खोया खोया सा हर शख्स यहाँ , 
बेचैनी का तूफ़ान लिए क्यों है?  

आज़ादी की तमन्ना लिए दिल में , 
हर सांस में घुटन में क्यों है ?
खुद अपनी राह बनाने निकला , 
भीड़ में  शामिल क्यों है ?

सीने में तूफानों से जज्बात , 
सहमा सहमा सा क्यों है ?
रिश्तो में पला बढ़ा , 
रिश्तो से अब चिढ़ क्यों है ?

उसूलो की ताकत , 
हकीकत के धरातल पर तड़पती क्यों है ?
घिरा हुआ है भीड़ से , 
फिर भी अकेला क्यों है ?

कुछ पाने की ख़ुशी नहीं , 
सब कुछ पा लेने की ज़िद्द क्यों है ?
अपनी पहचान बनाने चला था , 
दुसरो के अक्स में अपने को तलाशता क्यों है ?

मेहनत ही सफलता की कुंजी , 
परिश्रम से घबराता क्यों है ?
धैर्य और संयम का पाठ , 
हर मोड़ पर भूलता क्यों है ? 

कशमकश ये कैसी , 
रातो की नींद गायब क्यों है ?
खिलखिलाता चेहरा जिसकी पहचान , 
हर हँसी में दर्द  छलकता क्यों है ? 

कुछ तो बदली है आबो हवा , 
कुछ पानी में जहर है , 
घुट घुट कर सिसक रही ज़िन्दगी , 
ज़िन्दगी को शायद कुछ सुकून की जरुरत है।  

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