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Tuesday, November 14, 2017

बंजारे


कभी इधर , 
कभी उधर ,

कभी इस शहर , 
कभी उस नगर।   

कभी सपनो की तलाश में निकले , 
कभी रोज़ी रोटी का इंतजाम करने भटके।   

पैरो में पंख लग गए , 
एक जगह ये कहीं न ठहरे। 

कहाँ रहा अब एक ठिकाना रे , 
बंजारे।  हम सब बंजारे।  

1 comment:

  1. Daddi such hai hum sab banjarey hai.
    Yeh Duniya ek rangmanch hai, and hum sab ek kirdar nibha rahey hai.

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