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Tuesday, November 7, 2017

मुकद्दर



मुकद्दर जागेगा इक दिन , 
मैं मेहनत से क्यों हार मानू।  

मंज़िल मिलेगी इक दिन , 
मैं रोज़ सीढ़ियाँ तो चढ़ूँ।  

समय बदलेगा जरूर इक दिन , 
मैं समय की इज्जत तो करूँ।  

सफलता - असफलता तो परिणाम है कर्मो का , 
चलने से पहले ही इन सबसे क्यों डरूँ।  

कर्मो पर ही मेरा नियंत्रण है , 
सिर्फ किस्मत के सहारे ही क्यों बैठूँ।  

जीवन सिर्फ सेज नहीं फूलो की , 
काँटों से फिर क्यों डरूँ।  

प्रारब्ध जो भी होगा मेरा , 
मैं उस खुदा पर भरोसा तो रखूँ।  

4 comments:

  1. बस कर्म करते रहो फल ऊपर वाले पर छोड़ दो
    बहुत अच्छी सीख

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  2. बहुत खूब आनंद। लिखते रहे सीखते रहे।

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  3. बहुत खूब आनंद। लिखते रहे सीखते रहे।

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  4. Sarkar yeh tou Pura Ka Pura humsey prerit hai. Muqadar wah Rey muqadar

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