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Thursday, December 14, 2017

शब्द आमंत्रण



आओ शब्दो ,
आपको आमंत्रण देता हूँ।

सच लिखने का 'साहस' बनो ,
'हताशा ' के 'बादलों ' को छिन्न-भिन्न करो ,
'प्यार बनो' , 'अभिमान' बनो,
'गौरव' तुम , 'संस्कार' बनो।

आओ शब्दो ,
आपको आमंत्रण देता हूँ।

दुःखियों की 'पुकार' बनो,
जुल्मो की 'काट' बनो ,
सौहार्द का 'रस'  घोलो ,
नफरत का 'नाश' बनो।

आओ शब्दो ,
आपको आमंत्रण देता हूँ।

कुछ इस तरह से आज 'सजो' ,
आशा का 'नव संचार' करो ,
दुःख हरो , मद हरो ,
नव 'उल्लास' का रंग भरो।

आओ शब्दो ,
आपको आमंत्रण देता हूँ।

गीत बनो , कहानी रचो
श्रंगार लिखो , वेदना की पीड़ा में ढलो,
ख़ुशी या गम के फ़साने में बसो।
किसी भी रूप में आज ढलो। 

आओ शब्दो ,
आपको आमंत्रण देता हूँ।

दोस्ती के नए आयाम गड़ो ,
प्यार के अर्थ को अंजाम दो ,
बड़ो का आशीर्वाद लिखो ,
छोटो को स्नेह से निहाल करो।


आओ शब्दो , आपको आमंत्रण देता हूँ ,
हाथ जोड़कर , विनती करता हूँ ,
आज किसी कलमकार को आशीष  दो ,
उसकी रचना में स्थान ग्रहण कर उसे 'अमर' कर दो।     

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