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Friday, September 22, 2017

युग कवि - श्री रामधारी सिंह दिनकर को शत नमन।

मानव अपनी इच्छाशक्ति से , पहाड़ भी डिगा सकता हैं , रसातल समंदर के जाकर , मोती भी पा सकता हैं। गर ठान ने इक बार मन में , सभी चुनौतियाँ छोटी हैं , गर कदम उठा ले एक बार , सात लोक भी नाकाफी हैं। पहचान खुद को , अपनी राह बना , चलचलाचल फिर , कर्मो से खुद को ' महा मानव बना'। कह गए 'दिनकर ' बार बार ये , दीप्तिमान , हो प्रज्वल्लित , जीवन एक आहुति है , प्राणो में अपने तू ज्योत जगा। (हिंदी कविता के महान कवि रामधारी सिंह दिनकर जी के जन्मदिन - २३ सितम्बर पर श्रदांजलि स्वरुप लिखी चंद पंक्तियाँ)

1 comment:

  1. really it's an amazing creativity.. I enjoyed to my utmost level ....kindly do continue so .

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