Thursday, October 26, 2017

दुनिया के उसूल

बदल लिए है दुनिया ने उसूल , 
आप भी बदल लीजिये ,
सच्चाई और ईमानदारी के झोले में , 
थोड़ा झूठ और थोड़ा बेईमानी भर लीजिये।  

लद गए वो दिन जब सच्चे और ईमानदारों की , 
क़द्र और तरक्की होती थी , 
देख लीजिये अपने इर्द गिर्द , 
सबसे पहले इन्ही की बेइज़्ज़ती होती है।  

नहीं रहा वो दौर अब , 
जमाना बदल गया है , 
होते थे पहले भी पाखंडी , 
मगर अलग से पहचाने जाते थे , 
अब दौर अलग है , 
कौन , कहाँ , किस मोड़ पर , 
टकरा जाये - पहचानना असंभव है।  

अब कर्मो के फल की चिंता नहीं होती , 
भले - बुरे की श्रेणी अलग नहीं होती , 
अपने फायदे के लिए सब जायज़ लगता है , 
हर रिश्ता अब स्वार्थ से गढ़ता है।  

इंसानियत अब जैसे किताबो तक ही सिमट गयी है , 
शरीफो  की बेइज्जती सरेआम हो रही है , 
बुजुर्गो के आत्मसात कायदे कानूनों की , 
आधुनिकता के नाम पर बलि चढ़ रही है।  

बदल लिए है दुनिया ने उसूल , 
आप भी बदल लीजिये ,
सच्चाई और ईमानदारी के झोले में , 
थोड़ा झूठ और थोड़ा बेईमानी भर लीजिये। 

नहीं बदल सकते अपने उसूल , 
तो आइये स्वागत हैं मेरे स्कूल , 
कठिन डगर है मगर , 
दिल को मिलता है बड़ा सुकून।  

पग -पग में रोड़े होंगे , 
कुंठा के घेरे होंगे , 
नाते रिश्तेदार सब मुहँ मोड़ेंगे , 
लेकिन हम चैन की नींद सोयेंगे।  

न खोने की ज्यादा चिंता होगी , 
न बहुत कुछ पाने का लालच , 
जो मिलेगा राहे -ए - ज़िन्दगी , 
उसी में हँसी ख़ुशी ज़िन्दगी जी लेंगे।  

करेंगे अपना काम सिद्दत से , 
काम से अपनी पहचान बनायेंगे , 
दुनिया बदल ले भले अपने उसूल , 
हम "जो सही है " उसी ऱाह चलेंगें।  
  

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