Sunday, March 17, 2024

" धुन "

 ज़िन्दगी " मदारी " है , हम " जमूरे " , 

वक्त "डमरू" है , परिस्थितियाँ " धुन " है, 

बजना तय है - "नाचना" तो पड़ेगा ही , 

ज़िंदा रहने के लिये "थिरकना" जरुरी है।  


"थिरकन" तय करेगी रास्ता हमारा , 

अक्सर "रास्ते" कहाँ सरल होते है , 

"सरल" अगर सब कुछ होता यहाँ , 

"गुलाब " के साथ काँटे नहीं उगते।  


"काँटे" संघर्ष है , जीवटता है , 

"गुलाब " कामयाबी की दास्तां , 

उगने, पनपने और खिलने का सफ़र , 

धुन पर नाचते रहने का है परिणाम।  

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