Showing posts with label struggle. Show all posts
Showing posts with label struggle. Show all posts

Saturday, November 1, 2025

संघर्ष

 

यकीन जानिये ,

संघर्ष सबकी ज़िन्दगी में है ,

वो बात अलग है ,

सबके संघर्ष का स्तर अलग -अलग है। 

 

कोई संघर्ष से निखरता है ,

कोई संघर्ष से बिखरता है ,

कोई टूट जाता है ,

कोई नई परिपाटी गढ़ जाता हैं। 

 

बिना संघर्ष के जो पाता है ,

उसे क्या पता स्वाद संघर्ष का ,

भुरभुरा सा ज़िन्दगी भर ,

इक नन्ही ठोकर से बिखर जाता हैं। 

 

जो खड़ा रहता है संघर्षो में सीना तान ,

फिर उसके लिए क्या आँधी -तूफ़ान ,

तैयार हर परिस्थिति के लिये ,

शून्य से फिर खड़ा कर देता है मुकाम। 

 

जो बाधाओं से लड़ता है ,

जो संघर्षो में तपता है ,

वही निखर कर इक दिन ,

जग में "हीरे" सा दमकता हैं। 

 

डटा रहा अंतिम समय तक ,

वक्त तेरे लिये फिर थम जायेगा ,

तेरे जूनून की जिद्द में ,

जमीन क्या आसमां भी झुक जायेगा।

Thursday, February 20, 2025

आपाधापी

 

जीवन की आपाधापी में ,

सब कुछ जैसे छूट रहा है ,

ज्यूँ - ज्यूँ आगे बढ़ना है ,

त्यूँ - त्यूँ कुछ छूट जाना है।

 

रोज़ नई मशक्कत जीवन की ,

कुछ पाना कुछ खोना है ,

अधरों में मुस्कान लिये मुसाफिर ,

रोज थोड़ा हँसना , थोड़ा रोना हैं।

 

वक्त कहाँ थोड़ा सुकून के लिये ,

ये भी करना है , वो भी भरना है ,

कस्तूरी मृग सा , मृगतृष्णा सी  ,

कभी यहाँ , कभी वहाँ भटकना है।

 

दौड़ लगी हैं बड़ी भयंकर,

सब कुछ समेट लेना है ,

भोग्य को भोग सके तक,

खुद भोग हो जाना है।

Sunday, March 17, 2024

" धुन "

 ज़िन्दगी " मदारी " है , हम " जमूरे " , 

वक्त "डमरू" है , परिस्थितियाँ " धुन " है, 

बजना तय है - "नाचना" तो पड़ेगा ही , 

ज़िंदा रहने के लिये "थिरकना" जरुरी है।  


"थिरकन" तय करेगी रास्ता हमारा , 

अक्सर "रास्ते" कहाँ सरल होते है , 

"सरल" अगर सब कुछ होता यहाँ , 

"गुलाब " के साथ काँटे नहीं उगते।  


"काँटे" संघर्ष है , जीवटता है , 

"गुलाब " कामयाबी की दास्तां , 

उगने, पनपने और खिलने का सफ़र , 

धुन पर नाचते रहने का है परिणाम।  

Monday, May 21, 2018

चिर विश्राम

बहुत दूर तक जाना चाहता हूँ ,
जब तक थक कर चूर न होऊं ,
तब तक चलना चाहता हूँ ,
तुझमे मिलने से पहले ,
मैं जीना चाहता हूँ। 

जीवन रस से भरा हुआ है ,
हर रस का स्वाद चखना चाहता हूँ ,
जीत -मिले या हार ,
हर अनुभव लेना चाहता हूँ। 

कितने रंग बिखरे पड़े है ,
हर रंग का मतलब अलग अलग,
मैं उन रंगो से ,
अपना एक इंद्रधनुष बनाना चाहता हूँ। 

अनंत आकाश , धरती विशाल
जानता हूँ पग  छोटे मेरे  ,
फिर भी जिद्द है मेरी ,
अपना एक संसार बनाना चाहता हूँ। 

सुख - दुःख आएंगे कितने ही ,
उनको हँस कर पार करूँगा  ,
चिर निद्रा में जाने से पहले ,
जीवन को एक नया अर्थ देना चाहता हूँ। 

मेरा प्रारब्ध तेरे हाथो में ,
हर जगह साये की तरह मेरे साथ तू ,
ये जीवन तेरी थाती है ,
तुझमे मिलने से पहले -अपने पदचिन्ह उकेरना चाहता हूँ। 

जानता हूँ किराये का ये जहाँ ,
मेहमान बनकर आया हूँ ,
क्या लाया -क्या पाया के दलदल से उभरने से पहले ,
जीवन के हर क्षण को जीना चाहता हूँ। 

कमियाँ बहुत है मुझमे ,
हर पल सीख है जीवन में ,
अपनी जय -पराजय का मैं खुद ,
साक्षी बनना चाहता हूँ। 

चिर -विश्राम से पहले ,
खुद को जीवन समर में ,
तन -मन और कर्म से ,
पूर्णत :झोंकना चाहता हूँ। 

तेरी कृति हूँ मैं ,
तुझमे ही समाना है ,
जीवन सत्य अटल , अडिग है ,
कुछ उपमान मैं  भी गढ़ना चाहता हूँ। 

इतना ज्ञान बिखरा पड़ा है ,
एक जीवन में समेट पाऊँ ,
संभव नहीं है ,
बस किसी किताब का एक पन्ना बनना चाहता हूँ। 

राग , द्वेष , क्रोध , मद, लालच , घमंड 
फैला रहा है अपनी जड़े
इन सबसे विरक्ति का ,
कोई मार्ग खोजना चाहता हूँ। 

रिश्ते - नाते मतलब खो रहे ,
स्वार्थ के पनपते बीजो के बीच,
किसी असहाय और निर्बल की ,
एक आस की किरण बनना चाहता हूँ। 

मानवता का  नित रोज़ पतन ,
उसूलो का बलिदान ,
मूल्यों की रक्षा के खातिर ,
शंखनाद करना चाहता हूँ। 

जानता हूँ मिटटी से बना मैं ,
मिट्टी में ही मिल जाऊँगा ,
किस बात का घमंड करूँ ,
कोई फूल उग सके, वो मिट्टी बनना चाहता हूँ। 

चिर विश्राम में जाने से पहले ,
धरती में आने के,
अपने प्रयोजन को ,
इति -सिद्धम करना चाहता हूँ।  

Tuesday, February 6, 2018

संघर्ष



जिद्द है तो जूनून भी चाहिए
मंजिले यूँ ही हासिल नहीं होती ,
दाँव पर लगाना पड़ता है सब कुछ ,
कामयाबी यूँ ही खैरात में नहीं मिलती। 

पूछो जरा हीरे से ,
उसकी कीमत यूँ ही ज्यादा नहीं होती ,
जलकर , तपकर और भार सहकर ,
कालिख कोयले की उसे हटानी पड़ी। 

यूँ ही एवरेस्ट ने उच्चाई हासिल नहीं की ,
झेला उसने लाखो वर्षो का घर्षण ,
सिसक सिसक कर एक इंच बढ़ा ,
रातो रात उसकी तस्वीर नहीं बदली। 

उठो , गिरो , सम्भलो
फिर पुनः प्रयास करो
तोड़ेगी , मरोड़गी -ज़िन्दगी
कदम कदम पर इम्तेहान लेगी। 

हौंसलो में जिसके दम होगा ,
उसके माथे पर ही विजय तिलक होगा ,
ज़िन्दगी की संघर्ष गाथा का ,
वो नया नायक होगा।