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Saturday, November 1, 2025

संघर्ष

 

यकीन जानिये ,

संघर्ष सबकी ज़िन्दगी में है ,

वो बात अलग है ,

सबके संघर्ष का स्तर अलग -अलग है। 

 

कोई संघर्ष से निखरता है ,

कोई संघर्ष से बिखरता है ,

कोई टूट जाता है ,

कोई नई परिपाटी गढ़ जाता हैं। 

 

बिना संघर्ष के जो पाता है ,

उसे क्या पता स्वाद संघर्ष का ,

भुरभुरा सा ज़िन्दगी भर ,

इक नन्ही ठोकर से बिखर जाता हैं। 

 

जो खड़ा रहता है संघर्षो में सीना तान ,

फिर उसके लिए क्या आँधी -तूफ़ान ,

तैयार हर परिस्थिति के लिये ,

शून्य से फिर खड़ा कर देता है मुकाम। 

 

जो बाधाओं से लड़ता है ,

जो संघर्षो में तपता है ,

वही निखर कर इक दिन ,

जग में "हीरे" सा दमकता हैं। 

 

डटा रहा अंतिम समय तक ,

वक्त तेरे लिये फिर थम जायेगा ,

तेरे जूनून की जिद्द में ,

जमीन क्या आसमां भी झुक जायेगा।

Wednesday, September 10, 2025

उद्देश्य

 न जाने कहाँ से लुढ़कते लुढ़कते ,

किनारे लगा था वो बड़ा सा पत्थर ,

किसी रोज़ जब नदी में बाढ़ आयी थी ,

बहुत कोशिशों से कोई न हटा पाया था ,

उस पत्थर ने एक तरफ नदी की धार रोक दी थी ,

सब की उलाहना सहते सहते वो भी तंग था ,

"मेरी फूटी किस्मत " रोज़ रोता था ,

फिर आदत हो गयी उसे किनारे पर रहते रहते ,

नदी ने जमा कर दी थी गाद चारों ओर उसके ,

बच्चे आते थे , चढ़कर उसपर नदी में छलाँग मारते थे ,

वो रोज़ नदी को बहते देखता और ,

पुराने दिनों की यादों में खो जाता ,

फिर एक चौमास घनघोर बारिश हुई ,

नदी ने विकराल रूप धारण किया ,

जो मिला रास्ते में , सब निगल लिया ,

जब टकरायी उस शिला से,

बहुत वेग लगाया , खूब जोर लगाया ,

एक बार पत्थर का भी जी ललचाया ,

वो तो बहने के इन्तजार में ही पड़ा था,

मगर अचानक से उसे ख्याल आया ,

उसे सहारा मान नदी के उस किनारे ,

लहलहा रही थी फसलें ,

कुछ मकान बन चुके थे ,

सोचकर उसने अपना इरादा बदल लिया ,

नदी जितना वेग लगाती उसे उखाड़ने को ,

वो उतना ही धँसता गढ़ता चला जाता,

नदी ने समझाया , बुझाया उसको ,

साथ बहने की हिदायत दी ,

मगर टस से मस न हुआ वो हठी ,

अड़ा रहा और सारा पानी उतर गया ,

बच्चे -बड़े सब कहने लगे ,

इस "शिला" ने सबको बचा लिया,

शिला को अपना ठहरने का उद्देश्य समझ आ गया ,

दुत्कारें सब दुआओं में बदल गयी ,

शिला की तबसे पूजा होने लगी ,

कुछ भी बिना उद्देश्य के नहीं है जगत में ,

सबका इक प्रारब्ध है ,

वक्त का बस इन्तजार रहता है ,

अकारण  इस जगत में कुछ भी नहीं।     

 

Wednesday, August 20, 2025

संदेश

 

मुकर्रर है वक्त हर चीज़ का ,

बेवज़ह बैचनीयाँ फिजूल है ,

कर्मों पर ही बस हक़ हमारा ,

चलते रहना जरुरी हैं। 

 

वक़्त तोलता है , परखता है 

किस्मत अपना खेल खेलती है ,

सबसे कमजोर क्षण देकर ,

उजला दरवाजा खोलती है। 

 

बिना कारण कुछ नहीं घटता ,

हर घटना का इक उद्देश्य है ,

उतार -चढ़ाव पाठ ज़िन्दगी के ,

जीवन ईश्वर का सन्देश हैं। 

 

जीवन नाजुक साँसो की डोर ,

वक्त सबका बहुत सीमित है ,

क़द्र कर वक्त की "आनन्द " ,

हर क्षण जीवन से भरपूर है। 

Friday, April 18, 2025

क्षमता

 


हम , अधिकतर , 

अपनी क्षमताओं को कमतर आँकते है , 

और जो , अपनी क्षमताओं से ऊपर बढ़कर , 

कार्य कर जाते है , 

वही इतिहास बना जाते है, 


दुर्भाग्य से , अधिकतर , 

किसी भी कारणवश , 

अपनी क्षमताओं का प्रयोग , 

किये बिना ही , 

समस्त जीवन गुजार देते है।  

Thursday, December 8, 2022

प्रयास

 उम्मीद तब तक मत छोड़ो , 

जब तक अंतिम प्रयास न हो जाये, 

और अंतिम प्रयास ऐसा करो , 

वो प्रयास का पर्याय हो जाय। 


फँसे हो कभी घुप्प अंधेरों में , 

कोई जुगनू ही सहारा हो जाये , 

हो हार निश्चित तब भी , 

एक पुरजोर कोशिश की जाय।  


दुःखों का भँवरजाल हो सामने , 

"खड़े हो ", इसी का जश्न मनाया जाये , 

सफलता - असफलता जो मिले राहों में , 

"स्वीकार कर" , आगे बढ़ा जाय।   


सफर बढ़ रहा रोज़ आगे , 

क्या फर्क पड़ता है - कौन आगे , कौन पीछे 

जहाँ भी ख़त्म हो  सफर अपना  , 

वहाँ एक " शिलालेख " गढ़ जाय।  

Saturday, May 21, 2022

विश्वास

 

गर इच्छा शक्ति मजबूत तो डर वाजिब नहीं।

मन के विश्वास के सामने कोई मुश्किल नहीं ।1।

 

आत्मबल ने लिखी है विजय की इबारते कई।

तप कर ही निकलता है हीरा खदानों से कहीं ।2।

 

मुश्किलें तो आयेंगी कदम दर कदम पथ पर। 

करे पार बाधाएँ जो विजेता कहलाता भी वहीं ।3।

 

परिस्थितयाँ जाँचती है , तोलती है , परखती है । 

गिरे , संभले , चले - जीवटता की पहचान यही ।4।

 

ज़िन्दगी सिर्फ इक बार मिली है , महसूस कर। 

सार्थक तभी जब पदचिन्हो पर चले कोई ।5। 

 

Monday, August 3, 2020

लक्ष्य

लक्ष्य कैसा हो ?

समयबद्ध ,

नियमबद्ध ,

अनुशासनबद्ध ,

विशिष्ट ,

प्रेरक ,

और मंगलमय हो। 

 

लक्ष्य साधन से पहले ,

योजना ,

साधना ,

समर्पण ,

कर्मतप,

एकाग्रता

और

एकनिष्ठता हो। 

 

लक्ष्य साध्य कैसे हो ?

घुमते चक्र में बँधी मछली ,(साधना )

नीचे पानी में छाया देख, ( एकाग्रता )

धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा , (विश्वास)

एक तीर से , (कर्मतप )

चक्षु भेदन जैसा हो। ( एकनिष्ठता )


Friday, September 13, 2019

अमावस की रात और कुछ जुगनू




वो अमावस की रात ,
जितना कालिख अपने में समेट सकती थी ,
समेटे , कितनी काली थी। 

दूर कृत्रिम  रोशनी  के जलते चिराग भी ,
जैसे अपनी रौशनी को अपने तक ही ,
समेटे , जुगनू से भी फीके थे। 

चाँद को भी जैसे आगोश में लेकर ,
तारो की चमक भी सोखकर ,
वो रात , सचमुच , भयानक अमावस की रात थी। 

मगर कुछ जुगनू अपनी ज़िद्द पर अड़े थे ,
मंडरा कर इधर उधर , बिना डर के ,
वो इस भयानक " अमावस " रात को चिड़ा रहे थे। 


बड़े जिद्दी और जुनूनी ये जुगनू ,
अपने अस्तित्व को दाँव पर लगाकर  ,
पहली किरण आने तक डटे रहने पर अड़े थे।  

Saturday, August 10, 2019

सफर




यूँ तो चलना अकेले ही होता है ,
इस सफर में जिसे ,
हम ज़िन्दगी कहते है ,
मगर राहे - दोराहे पर ,
मिलते चले जाते है ,
कुछ साथी ,
चलते है कदम दर कदम ,
फिर कुछ छूट जाते है ,
और कुछ नए मिल जाते है ,
कुछ सबब दे जाते है ,
कुछ सबक ,
कुछ रास्ते सपाट से ,
कुछ में चुभते कंकड़ ,
कुछ खट्टी ,
कुछ मीठी यादो से ,
चलता रहता है सफर ,
तलाश में मंजिल की।

Sunday, July 14, 2019

यूँ ही बेवजह

यूँ ही बेवजह ज़िन्दगी को , 
मत उलझाइए , 
सीधी और सरल है , 
बस चलते जाइये।  

जो मिलेगा , 
वो मुकद्दर , 
जो नहीं मिलेगा , 
उस पर किसी और का हक़ , 
अपनी तरफ से , 
मंजिल की ओर , 
कदम बढ़ाते जाइये।  

दे अगर साथ कोई , 
नसीब आपका , 
नहीं तो , 
अकेले ही , 
चलते जाइये।  

हार जीत , 
सफलता असफलता , 
खोना -पाना ,
मन के भाव है , 
सीख कर कुछ फलसफे , 
मुस्कराहट होठों पर लेकर , 
आगे बढ़ जाईये।  

ये ज़िन्दगी है , 
रोज़ नए रंग दिखायेगी , 
कूची आपके हाथ में , 
अपने जीवन का चित्र, 
खुद बनाइये।  

Monday, June 3, 2019

इनायत


हौंसला चट्टानों से टकराने का ,
                                     हम भी रखते हैं ,                                        
जिम्मेदारियों ने धार कुछ ,
कुंद कर दी। 

अकेले दुनिया नापने की हिम्मत ,
हम भी रखते है ,
साथ लेकर चलने की कवायद ने ,
चाल मंद कर दी। 

हवा में उड़ने की ख्वाइश ,
हम भी रखते है ,
जमीन से जुड़े रहने की नसीहत,
पँखो को परवाज भरने नहीं दी। 

शिकायतें बहुत रही ज़िन्दगी से ,
हमें भी ,
मगर इनायतों को गिना तो ,
वो सब पर भारी निकली। 

Friday, May 24, 2019

जीत


जीत , 
चाहे छोटी हो या , 
बड़ी , 
सब कुछ छुपा लेती है , 
कमियाँ , 
खामियाँ , 
अवगुण , 
क्यूंकि , 
जीत की परत , 
बहुत मोटी होती है , 
वह सब कुछ, 
अपने नीचे , 
छुपाकर , 
बस , 
ऊपरी सतह पर , 
मेहनत , 
जज्बा , 
जूनून , 
और हौंसला , 
दिखाती है, 
जीत , बस , 
जीत होती है , 
और , 
बहुत जरुरी होती है।   

Tuesday, May 21, 2019

गुरुर


मत इतराना अपने गुरुर पर ,
वक्त के आगे ये कुछ भी नहीं ,
देखा है मिट्टी में मिलते ,
रावण को और सिकंदर को भी।  

कर्मो की लकीरें ही,
याद रहती है जमाने को ,
जीये तो कृष्ण भी थे ,
और कंस भी।  

Tuesday, April 2, 2019

बढ़ती उम्र


बढ़ती उम्र का शुक्रिया , 
बहुत कुछ तजुर्बा दिया , 
ज़िन्दगी को समझने का , 
एक नया नजरिया दिया।  

माथे की लकीरें , 
संघर्षो से जूझने का प्रमाण है , 
कान के नीचे पके बाल , 
अनुभव की खान है , 
माथे की बढ़ी चौड़ाई, 
सफलताओ की पहचान है।  

थोड़ा आगे बड़ा पेट , 
परिस्थितियों से सामंजस्य है , 
गालो में फुलाव , 
छोटी छोटी खुशियों का सार है।  

धीमी और मंद चाल , 
धैर्य का सलीका है , 
आँखों में चश्मा , 
हर चीज को बारीकी से देखने का तरीका है।  

छोटी छोटी बातें भूलना, 
सयानेपन की निशानी है , 
कभी कभी ज़िद पर अड़ जाना , 
बचपने को ज़िंदा रखने की ख्वाईश है।  

Tuesday, March 26, 2019

" मैं "




मेरी साँस तुझसे ,
रहमते तुझसे ,
कण कण तुझसे ,
तेरी दी हुई ज़िन्दगी पर ,
फिर "मैं " कैसे ?

तू हँसाये ,
तू रुलाये ,
गिरु गर कभी तो ,
तू सँभाले ,
फिर " मैं " कहाँ टिके ?

तू आधार ,
तू निराकार ,
तू जगतव्यापि ,
तुझसे सारा संसार ,
फिर "मैं " का भ्रम कैसे ?

जब कभी " मैं " छाता है ,
मुझे तेरा ख्याल आता है ,
हे ! जग के स्वामी ,
“अहं” मेरा काफूर हो जाता है। 

Image Source - Google 

Thursday, February 21, 2019

कदम



रास्ते खुलेंगे , 
कदम तो बढ़ा , 
एक रास्ता बंद तो क्या , 
नए रास्ते बना।  

कम तू किसी से नहीं , 
'कमी तुझमे' ये भ्रम , 
कर सकता है सब कुछ , 
संकोच मत रख कोई मन में।  

रोड़े आयेंगे राहो में , 
सब्र का इम्तेहां होगा , 
हौंसला तुलेगा ज़िन्दगी तराजू में ,
तब "तू" निखरेगा।  

गढ़ेगा तेरे नाम का पत्थर भी , 
जीवन सफर की राहों में , 
संघर्ष और जूनून से , 
अपने को इस लायक तो बना।  

हार जीत , सफलता -असफलता 
ये तो जीवन राह के पड़ाव है , 
ज़िन्दगी तो चलती जानी है , 
"विजय यात्रा " तो तुझे खुद बनानी है।   

Tuesday, February 5, 2019

मसले

बहुत मसले यूँ ही हल हो जाते ,
अगर " मैं " से "हम " हो जाते।  

कितने रिश्ते यूँ ही नहीं बिखरते , 
थोड़ा वो और थोड़ा तुम झुक जाते।  

पछतावा अब करने से क्या फायदा , 
उस समय जरा हिम्मत कर जाते।  

ज़िन्दगी की राह कितनी आसान हो जाती , 
अगर गलतियों से सबक सीखे होते।  

माना बहुत चुनौतियाँ है राह में , 
अपने दम ख़म को परखे तो होते।  

तमाम खूबियों से नवाजा ईश्वर ने आपको , 
वक्त रहते फैसले लेते तो आज कहाँ होते।