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Wednesday, April 22, 2026

सब्र का फल

 

रात कितनी काली क्यों हो,

एक जुगनू भ्रम तोड़ देता है,

उदासी कितनी भले ही हो,

एक ख़ुशी का पल सब भुला देता है।

 

लहरें कितनी तेज क्यों हो,

एक पत्थर उसे रोक ही देता है,

तूफानों को अक्सर एक,

नन्हा पौधा हँसकर सह लेता है।

 

हार तो बस एक सबक है,

जीतने की तैयारी का एक कदम है,

मेहनत एक दिन रंग लायेगी ही,

सब्र का फल मीठा होता है।

 

जूनून कुछ पाने का सच्चा है,

कायनात भी साथ देती है ,

विश्वास हो खुद पर तो,

सफलता तुम्हारे क़दमों में होती है

Saturday, November 1, 2025

संघर्ष

 

यकीन जानिये ,

संघर्ष सबकी ज़िन्दगी में है ,

वो बात अलग है ,

सबके संघर्ष का स्तर अलग -अलग है। 

 

कोई संघर्ष से निखरता है ,

कोई संघर्ष से बिखरता है ,

कोई टूट जाता है ,

कोई नई परिपाटी गढ़ जाता हैं। 

 

बिना संघर्ष के जो पाता है ,

उसे क्या पता स्वाद संघर्ष का ,

भुरभुरा सा ज़िन्दगी भर ,

इक नन्ही ठोकर से बिखर जाता हैं। 

 

जो खड़ा रहता है संघर्षो में सीना तान ,

फिर उसके लिए क्या आँधी -तूफ़ान ,

तैयार हर परिस्थिति के लिये ,

शून्य से फिर खड़ा कर देता है मुकाम। 

 

जो बाधाओं से लड़ता है ,

जो संघर्षो में तपता है ,

वही निखर कर इक दिन ,

जग में "हीरे" सा दमकता हैं। 

 

डटा रहा अंतिम समय तक ,

वक्त तेरे लिये फिर थम जायेगा ,

तेरे जूनून की जिद्द में ,

जमीन क्या आसमां भी झुक जायेगा।

Saturday, September 20, 2025

सफलता की कुँजी

 

इक जूनून सा जगाना पड़ता है ,

ध्यान बगुले सा लगाना पड़ता है ,

आसानी से नहीं मिलती मंजिल ,

बाकियों से अधिक श्रम करना पड़ता है। 

 

विश्वास खुद पर रखना होता है ,

निराशाओं को पार करना होता है ,

हुनर तो बहुतों के पास हैं "आनन्द " ,

एक कदम औरों से आगे चलना होता है। 

 

शंका स्वंय पर कमजोरी है ,

इंसान के बूते सब कुछ हासिल है ,

करना पड़ता है त्याग थोड़ा ,

मखमल में कहाँ कमल खिलता हैं। 

 

ध्यान और मेहनत सफलता की कुँजी है ,

परिस्थितियाँ तो बस इक बहाना है ,

लक्ष्य सामने , परिश्रम एकसार ,

गर्जन में ही कदम्ब के फूल खिलते है। 

Saturday, January 18, 2025

शिरा

मैं भी वो शिरा ढूंढ रहा है , 

जिससे पकड़कर , 

मैं भी चढ़ सकूँ , 

सफलता की ऊँचाइयाँ , 

मैं भी चख सकूँ ,

कामयाबी का स्वाद , 

न जाने क्यों , 

नहीं मिल रहा मुझे वो शिरा , 

कोशिश तो मैं भी कर रहा , 

रात -दिन , हर पल , 

जोश भी नित भर रहा , 

मेहनत से भी नहीं डर रहा , 

फिर क्या कारण हो सकता है , 

जो मुझे नहीं मिल रहा वो उपाय , 

जिससे मैं भी चढ़ सकूँ , 

वो सीढ़ियाँ , जिसे देख , 

दुनिया कहती है , 

हाँ , देखो , वह सफल हुआ।   

Wednesday, December 19, 2018

शिखर


वो यूँ ही शिखर पर नहीं पहुँचा होगा ,
कितना संघर्ष ,
कितना त्याग ,
कितने ताने ,
कितनी मेहनत ,
हर सीढ़ी पर अपना कलेजा रखा होगा ,
वो यूँ ही शिखर पर नहीं पहुंचा होगा। 

वो जज्बा ,
वो हिम्मत ,
वो जूनून ,
वो पागलपन ,
वो खुद पर विश्वास हर कदम रखा होगा ,
वो यूँ ही शिखर पर नहीं पहुंचा होगा। 

सीखने की ललक ,
हर हार से सबक ,
निराशा में आस की किरण,
हार में जीत की झलक,
हर परिस्थिति से पार पाया होगा ,  
वो यूँ ही शिखर पर नहीं पहुंचा होगा।  

Tuesday, November 7, 2017

मुकद्दर



मुकद्दर जागेगा इक दिन , 
मैं मेहनत से क्यों हार मानू।  

मंज़िल मिलेगी इक दिन , 
मैं रोज़ सीढ़ियाँ तो चढ़ूँ।  

समय बदलेगा जरूर इक दिन , 
मैं समय की इज्जत तो करूँ।  

सफलता - असफलता तो परिणाम है कर्मो का , 
चलने से पहले ही इन सबसे क्यों डरूँ।  

कर्मो पर ही मेरा नियंत्रण है , 
सिर्फ किस्मत के सहारे ही क्यों बैठूँ।  

जीवन सिर्फ सेज नहीं फूलो की , 
काँटों से फिर क्यों डरूँ।  

प्रारब्ध जो भी होगा मेरा , 
मैं उस खुदा पर भरोसा तो रखूँ।