Tuesday, July 7, 2026

मलाल ( पछतावा )

 

काश वो किया होता,

आज ये होता।

काश ऐसा नहीं किया होता,

आज ये होता।

 

ज़िंदगी के सफ़र में

कुछ मोड़ ऐसे भी आते हैं,

जहाँ सही और ग़लत का फ़ैसला

वक़्त के बाद ही समझ आता है।

 

कुछ मलाल

जीवन भर साथ चलते हैं,

सीने में चुभे काँटों-से

हर ख़ामोशी में पलते हैं।

 

कुछ शब्द

जो कहे नहीं गए,

कुछ हाथ

जो थामे नहीं गए,

कुछ रिश्ते

जो अहंकार की भेंट चढ़ गए,

और कुछ सपने

जो डर के कारण जीए नहीं गए।

 

फिर उम्र भर

मन उन्हीं गलियों में भटकता है,

जहाँ "अगर" और "काश"

हर रोज़ एक नया मुक़दमा लड़ते हैं।

 

मगर सच तो यही है

बीता हुआ कल

किसी की पुकार नहीं सुनता।

समय की धारा

किसी के आँसुओं के लिए नहीं रुकती।

 

मलाल का बोझ

सिर्फ़ कंधे झुका देता है,

पर अतीत की एक भी घटना को,

बदल नहीं पाता।

 

इसलिए,

यदि पछताना ही है,

तो इतना पछताओ

कि वही भूल

फिर कभी दोहराई जाए।

 

यदि रोना ही है,

तो इतना रो लो

कि आँखों में

नई उम्मीद के लिए जगह बन जाए।

 

जो खो गया,

वह एक कहानी है।

जो बचा है,

वही पूरी ज़िंदगी है।

 

हर मलाल

एक शिक्षक बनकर आता है,

जो दर्द की भाषा में

सबसे बड़ी सीख पढ़ाता है।

 

इसलिए

अब "काश" की कैद से निकलो,

"आज" का हाथ थामो।

जो अधूरा रह गया था,

उसे आज पूरा करने का साहस जुटाओ।

 

क्योंकि अंत में

जीवन यह नहीं पूछता

कि तुमसे कितनी गलतियाँ हुईं,

 

वह केवल इतना पूछता है

क्या तुमने उनसे कुछ सीखा?

 

और जिस दिन

इस प्रश्न का उत्तर "हाँ" हो जाएगा,

उसी दिन

मलाल स्मृति तो रहेगा,

मगर दुःख  नहीं रहेगा।