Monday, October 26, 2026

यायावरी

 

घूम यायावर,
देख दुनिया,
पहाड़ देख,
मैदान देख,
देख झील-झरने,
रेगिस्तान देख,
समंदर देख,
देख बर्फ़ से ढकी पर्वतमालाएँ,
प्रकृति का हर रूप देख।

ऊँट के कूबड़ देख,
हाथी की चाल देख,
देख शेर का अंदाज़,
मानुस हर जगह के देख,
प्रकृति का सामंजस्य देख।

उठ यायावर,
दुनिया देख।

कहीं सूरज को उगते देख,
कहीं शाम को ढलते देख,
कहीं चाँद को निहारते लोग,
कहीं तारों के नीचे पलते देख।

कहीं रोटी के लिए संघर्ष देख,
कहीं दौलत का अंबार देख,
कहीं रिश्तों की गर्माहट देख,
कहीं अपनों के बीच दीवार देख।

कहीं भाषा बदले, कहीं वेश बदले,
कहीं पूजा के तरीके देख,
कहीं रंग अनेक, कहीं धर्म अनेक,
पर सबमें धड़कते दिल एक देख।

कहीं पर्वत-सा धैर्य देख,
कहीं नदी-सा बहाव,
कहीं ठहराव में छिपी शांति,
कहीं लहरों का उन्मुक्त स्वभाव।

कभी पगडंडियों पर चलकर देख,
कभी अनजान राहों पर निकलकर देख,
किताबों में जो नहीं मिलता,
वो अनुभवों से सीखकर देख।

उठ यायावर,
दुनिया देख,
और लौटे जब अपने घर,
तो पहले जैसा मत लौट,
कुछ नज़रिया बदलकर ला,
कुछ इंसानियत बढ़ाकर ला,
कुछ अनुभवों की रोशनी,
अपने भीतर भरकर ला।

उठ यायावर,
दुनिया देख,
ज़िंदगी को जीकर देख!

Wednesday, October 7, 2026

ज़िन्दगी विद्यालय

 

मैं ताउम्र

ज़िंदगी के विद्यालय का
एक छात्र ही रहूँगा,
रोज़ एक नया पाठ पढ़ूँगा,
पुराने पाठ दोहराऊँगा,
और फिर भी
किसी न किसी परीक्षा में
अनुत्तीर्ण होता रहूँगा।

इस विद्यालय में
उत्तीर्ण होना सरल नहीं है,
यहाँ प्रश्नपत्र
परीक्षा से पहले नहीं मिलता,
और उत्तर
अक्सर परीक्षा के बाद समझ आता है।

यहाँ
ठोकरें शिक्षक हैं,
अनुभव पाठ्यपुस्तक,
समय प्रधानाचार्य
और परिस्थितियाँ
सबसे कठिन परीक्षक।

कुछ पाठ
दूसरों की गलतियों से सीखेंगे,
कुछ अपनी गलतियों से,
और कुछ ऐसे होंगे
जिनकी कीमत
पूरी उम्र चुकानी पड़ेगी।

कभी रिश्ते पढ़ेंगे,
कभी रिश्ते खोकर समझेंगे,
कभी सफलता पर इतराएँगे,
कभी असफलता से टूटेंगे,
और फिर उसी टूटन से
खुद को जोड़ना सीखेंगे।

इस विद्यालय की सबसे बड़ी विडंबना है,
यहाँ अंतिम परीक्षा
तब होती है,
जब विद्यार्थी
परीक्षा देने के योग्य ही नहीं रहता।

इसलिए
अब उत्तीर्ण होने की चाह नहीं,
बस इतना प्रयास है,
कल का मैं
आज से थोड़ा बेहतर हो,
कुछ कम अहंकारी,
कुछ अधिक समझदार,
और थोड़ा अधिक इंसान हो।

क्योंकि
ज़िंदगी के इस विद्यालय में
डिग्री किसी को नहीं मिलती,
सिर्फ अनुभव मिलता है,
और अंत में
वही हमारी
सबसे बड़ी योग्यता बनता है।