कारवां जारी हैं ..................
निकल पड़ा हूँ लेखन यात्रा में , लिए शब्दों का पिटारा ! भावनाओ की स्याही हैं , कलम ही मेरा सहारा !!
Monday, June 22, 2026
Saturday, June 20, 2026
आ जाया करो
कब से है इंतज़ार तुम्हारा,
कभी मिलने आ जाया करो ।
तन्हा-तन्हा सी है ज़िंदगी,
आकर कभी महफ़िल जमाया करो॥
मसरूफ़ियत से वाक़िफ़ हैं हम तुम्हारी,
सबका बोझ तुम उठाए हो।
लम्हा-लम्हा कट रही है ज़िंदगी,
कुछ पल हमारे लिए भी चुराया करो॥
शिकवा नहीं है कोई तुमसे,
बस दिल की बात सुना जाया करो।
राहों में बिछी हैं यादें तुम्हारी,
कभी उन राहों से गुज़र जाया करो॥
उम्र यूँ ही गुज़र जाएगी,
वक़्त फिर लौटकर न आएगा।
जो पल हैं आज हमारे पास,
उन्हें साथ मिलकर बिताया करो॥
कब से है इंतज़ार तुम्हारा,
ये दिल आज भी पुकारता
है।
जब भी याद हमारी आए,
बस एक बार चले आया करो॥
Sunday, June 14, 2026
फितरत
हमें सुकून चाहिये ही नहीं ,
ज्यादा सुकून से हमें बेचैनी हो जाती है ,
हमारा दिमाग फड़फड़ाने लगता है ,
उसको खुराक की कमी हो जाती है ,
फिर उसे तलाश होने लगती है ,
उधेड़बुन की , तलाशने लगता है ,
वो मसले , जिनसे सुकून छीनने लगता है ,
मसला कुछ भी हो सकता है ,
व्यक्तिगत या सामाजिक ,
देश -दुनिया की या समाज की ,
वो अपनी फितरत छोड़ नहीं सकता ,
क्यूंकि ज्यादा सुकून उसको ,
हजम ही नहीं हो सकता ,
उसे दौड़ते रहना पसंद है ,
और यही दौड़ तो उसे ,
ज़िंदा रखती है अंत तक ,
जब तक साँस की आखिरी डोर ,
उसे थाम न
ले।
Wednesday, June 10, 2026
आसान
ज़िन्दगी आसान है ,
आसान रहने दीजिये ,
बेवजह की बातें बहुत है ,
काम की बातें सुना कीजिये ,
लोग कहते रहेंगे ,
लोगों को कहने दीजिये ,
सुकून से रहना है ,
कुछ बातों को जाने दीजिये।
ज़िन्दगी एक बार मिली है ,
बेवजह वक्त जाया न कीजिये ,
सफ़र में जो मिले काम का ,
साथ लेकर चलते रहिये ,
कल की चिंता कल पर ,
बीत गया जो इतिहास रहने दीजिये ,
किस्मत से जो आज मिला है ,
उसके पल -पल का मजा लीजिये।
Tuesday, June 9, 2026
ए आई और हम
कुछ ऐसा लिखो आनन्द अब ,
जो ए आई भी न लिख पाये ,
कुछ ऐसे सवाल बूझो ,
जो गूगल के पास भी न हो ,
नया कुछ ही अंतर पैदा करेगा ,
ए आई और तुम्हारी लेखनी में ,
अभी भी बहुत उम्मीद बची है ,
ए आई वही लिखेगा ,
जो अब तक लिखा जा चुका है ,
गूगल अब भी उन्ही प्रश्नों का उत्तर देगा ,
जो हल किये जा चुके है कभी ,
नया लिखने के लिये अभी भी बहुत है ,
और हजारों सवाल अब भी अनुत्तरित है ,
और यही अभी की "उम्मीद " है ,
ये उम्मीद और सम्भावना बहुत बड़ी है,
इंसानो की बुद्धि और रचनात्मकता की ,
अभी तक तो कोई सीमा नहीं हैं ,
मजे की बात तो ये है " आनन्द "
ए आई और गूगल सब ,
उसी करामाती ढाई सौ ग्राम के ,
मस्तिष्क की बानगी भर है,
ए आई अभी एक जमा एक को दो ही कहेगा ,
एक जमा एक को ग्यारह करने में अभी बहुत देर हैं।
Saturday, June 6, 2026
उकाव -हुलार
पहाड़ों से मैदान
,
वो मैदान से हो गए
,
सारे बिखर से गये
,
थम गए , खो गए ,
जैसे पहाड़ों की नदी
,
खो देती है अपनी आवाज
,
अपनी गति ,
अपना बहाव ,
मैदान उसके सपनों
से ,
बहुत विपरीत होता
है ,
वो सामंजस्य बिठाने
की कोशिश करती है ,
मगर फिर थक हार कर
,
अपनी नियति समझ समझौता
कर लेती है ,
उसने हुलार को आसान
समझा ,
उकाव को कठिन ,
और फिर उसके पास ,
वापस लौटने का भी
कोई विकल्प नहीं होता,
गर होता तो क्या वो
,
उकाव चढ़ने का साहस
कर पाती ?
कुमाउँनी शब्द
उकाव : चढ़ाई
हुलार : उतराई व ढलान
Tuesday, June 2, 2026
चिंतन
चिंता नहीं ,चिंतन
होना चाहिए ,
भविष्य हमें कैसे
चाहिए ,
दुनिया जिन हालातों
से गुजर रही है ,
इस बात पर मंथन होना
चाहिये।
जिस रफ़्तार से बदल
रही दुनिया ,
पुरानी परिपाटियाँ
ध्वस्त हो रही ,
नये परिपेक्ष्य में
कैसी हो दुनियाँ ,
इस बात पर मंथन होना
चाहिये।
जो पहले कल्पना था
, अब यथार्थ है ,
मानव स्वभाव लेकिन बदला नहीं है ,
लग रहे है उसके हाथ
अस्त्र -शस्त्र नए ,
उपयोगों पर उनके मंथन
चाहिये।
रिश्ते नातों की नींव
भी दरक रही ,
सबको समाज बस नाम
के लिए चाहिये ,
ऑनलाइन समाज की नयी
दुनिया बस चुकी ,
उस समाज की नींव पर
चिंतन चाहिये।
