Friday, July 17, 2026

फितरत

 

जो मिला है, उसमें चैन नहीं,

जो नहीं मिला, उसी की तलाश है।

अपने आँगन के फूलों को भूलकर,

दूसरों के बाग़ की प्यास है।

 

तुलनाओं की इस अंधी दौड़ में,

वह खुद से ही दूर होता जाता है,

ईर्ष्या की आग में जल-जलकर,

अपना ही सुकून खोता जाता है।

 

ना उसे अपने हिस्से की धूप भाती है,

ना अपने चाँद की चाँदनी,

बस दूसरों के उजालों को देखकर,

मन में भर लेता है वीरानी।

 

समझ ले वो गर एक बात ,

ज़िन्दगी हो जायेगी कितनी आसान ,

सबका अपना नसीब और कर्मों का लेखा,

गाँठ बांध ले गर वह यह ज्ञान। 

 

इंसानी फ़ितरत सच में कमाल की है,

पर सुधर जाये तो वरदान है,

अपने सुख को पहचान ले जो,

उसी का जीवन महान है।

Monday, July 13, 2026

जेन ज़ी — नई सदी की आवाज़


जेन ज़ी की आँखों में, सपनों का आसमान है,

कंधों पर भविष्य का, एक विशाल जहान है।

निडर, बेख़ौफ़, तेज़ क़दमों से चलती ये पीढ़ी,

समय की धड़कनों में, इनकी ही पहचान है।

 

इनके हाथों में मोबाइल है, पर जड़ों से रिश्ता भी,

दादी की कहानियाँ हैं, और डिजिटल दुनिया भी।

ये जानते हैं मिट्टी की खुशबू का अर्थ क्या है,

और आकाश छूते सपनों की ऊँचाई भी।

 

भावनाएँ हैं इनमें, पर विवेक की लौ भी,

सिर्फ़ बहाव नहीं, दिशा चुनने की सोच भी।

लोग चाहे कह दें इन्हें लापरवाह या अलग,

पर हर निर्णय के पीछे, एक गहरी खोज भी।

 

ये प्रश्न करते हैं, पर उत्तर गढ़ते भी हैं,

रास्ते नहीं मिलते, तो नए रास्ते पढ़ते भी हैं।

हार को अंत नहीं, अनुभव मानते हैं,

और गिरकर फिर उठना, बेहतर समझते भी हैं।

 

ये वही पीढ़ी है, जो सीमाएँ तोड़ेगी,

विज्ञान, कला, विचारों से दुनिया जोड़ेगी।

एक शताब्दी की दिशा और दशा बदलने को,

अपनी मेहनत से नया इतिहास मोड़ेगी।

 

 

कल का सूरज इनके हाथों से उगेगा,

मानवता का सफ़र नई ऊँचाइयों तक पहुँचेगा।

जेन ज़ी कोई साधारण अध्याय नहीं है,

ये आने वाले युग का पहला सवेरा है।


Tuesday, July 7, 2026

मलाल ( पछतावा )

 

काश वो किया होता,

आज ये होता।

काश ऐसा नहीं किया होता,

आज ये होता।

 

ज़िंदगी के सफ़र में

कुछ मोड़ ऐसे भी आते हैं,

जहाँ सही और ग़लत का फ़ैसला

वक़्त के बाद ही समझ आता है।

 

कुछ मलाल

जीवन भर साथ चलते हैं,

सीने में चुभे काँटों-से

हर ख़ामोशी में पलते हैं।

 

कुछ शब्द

जो कहे नहीं गए,

कुछ हाथ

जो थामे नहीं गए,

कुछ रिश्ते

जो अहंकार की भेंट चढ़ गए,

और कुछ सपने

जो डर के कारण जीए नहीं गए।

 

फिर उम्र भर

मन उन्हीं गलियों में भटकता है,

जहाँ "अगर" और "काश"

हर रोज़ एक नया मुक़दमा लड़ते हैं।

 

मगर सच तो यही है

बीता हुआ कल

किसी की पुकार नहीं सुनता।

समय की धारा

किसी के आँसुओं के लिए नहीं रुकती।

 

मलाल का बोझ

सिर्फ़ कंधे झुका देता है,

पर अतीत की एक भी घटना को,

बदल नहीं पाता।

 

इसलिए,

यदि पछताना ही है,

तो इतना पछताओ

कि वही भूल

फिर कभी दोहराई जाए।

 

यदि रोना ही है,

तो इतना रो लो

कि आँखों में

नई उम्मीद के लिए जगह बन जाए।

 

जो खो गया,

वह एक कहानी है।

जो बचा है,

वही पूरी ज़िंदगी है।

 

हर मलाल

एक शिक्षक बनकर आता है,

जो दर्द की भाषा में

सबसे बड़ी सीख पढ़ाता है।

 

इसलिए

अब "काश" की कैद से निकलो,

"आज" का हाथ थामो।

जो अधूरा रह गया था,

उसे आज पूरा करने का साहस जुटाओ।

 

क्योंकि अंत में

जीवन यह नहीं पूछता

कि तुमसे कितनी गलतियाँ हुईं,

 

वह केवल इतना पूछता है

क्या तुमने उनसे कुछ सीखा?

 

और जिस दिन

इस प्रश्न का उत्तर "हाँ" हो जाएगा,

उसी दिन

मलाल स्मृति तो रहेगा,

मगर दुःख  नहीं रहेगा।