कब से है इंतज़ार तुम्हारा,
कभी मिलने आ जाया करो ।
तन्हा-तन्हा सी है ज़िंदगी,
आकर कभी महफ़िल जमाया करो॥
मसरूफ़ियत से वाक़िफ़ हैं हम तुम्हारी,
सबका बोझ तुम उठाए हो।
लम्हा-लम्हा कट रही है ज़िंदगी,
कुछ पल हमारे लिए भी चुराया करो॥
शिकवा नहीं है कोई तुमसे,
बस दिल की बात सुना जाया करो।
राहों में बिछी हैं यादें तुम्हारी,
कभी उन राहों से गुज़र जाया करो॥
उम्र यूँ ही गुज़र जाएगी,
वक़्त फिर लौटकर न आएगा।
जो पल हैं आज हमारे पास,
उन्हें साथ मिलकर बिताया करो॥
कब से है इंतज़ार तुम्हारा,
ये दिल आज भी पुकारता
है।
जब भी याद हमारी आए,
बस एक बार चले आया करो॥