Wednesday, April 8, 2026

आहिस्ता


 आहिस्ता -आहिस्ता चल ज़िन्दगी ,

हर मंजर का लुत्फ़ लेने दे,

बस एक बार मिली है ज़िंदगानी ,

जरा जी भर कर जी लेने दे।

 

थोड़ी धूप, थोड़ी छाँव मिले,

हर रंग को दिल में बसने दे,

कभी हँसी की गूंज उठे,

कभी आँसू भी बहने दे।

 

ना भाग इस कदर कि खुद से ही दूर हो जाए,

इन लम्हों को थोड़ा ठहरने दे,

जो छूट गए हैं रास्ते में,

उन ख्वाबों को फिर से पलने दे।

 

आहिस्ता-आहिस्ता चल ज़िन्दगी,

हर लम्हे को गीत बनने दे,

बस एक बार मिली है ज़िंदगानी,

हर साँस का एहसास होने दे।


Monday, April 6, 2026

सनक

  

इंसानों के अंदर एक सनक है,

हरेक की सनक अलग है,

और जहाँ सनकें मिल जाती हैं,

वहीं से एक नया अध्याय खुल जाता है।

 

सनकों का एक अलग संसार है,

हरेक की सनक का एक स्तर है,

कुछ करना है गर इस जहाँ में,

तो हर दिल में एक सनक ज़रूरी है।

 

ये सनक ही राह दिखाती है,

अंधेरों में दीप जलाती है,

जब हिम्मत भी साथ छोड़ दे,

तब ये ही कदम बढ़ाती है।

 

कुछ की सनक उन्हें ऊँचा उठाती है,

कुछ की उन्हें सिखा जाती है,

हार और जीत के इस खेल में,

यही असली पहचान बनाती है।

 

मत दबाओ इस आग को अंदर,

इसे खुलकर जलने दो,

क्या पता इसी एक सनक से

तुम अपना मुकाम गढ़ दो।

 

पर याद इतना भी रहे,

ये राह कभी भटक जाए,

एक की सनक दूसरे से टकराकर,

कहीं सब कुछ बिखर जाए।

 

क्योंकि सनकों ने जब भी हद पार की,

समाज को तोड़ा-मरोड़ा ही है,

सनक अगर हद में रहे तो पहचान बनाती है,

और हद पार करे तो इंसान मिटाती है।