Thursday, April 2, 2026

एक संदेश - बच्चों के नाम

आसमां तुम्हारा, ज़मीन तुम्हारी,

सागर तुम्हारा, ये जहाँ तुम्हारा,

सीमाओं में खुद को मत बाँधो,

हर दिशा में फैला है उजियारा।

 

सपनों को ऊँची उड़ान दो,

पंखों में हौसलों की आग भरो,

जहाँ तक जाती है नज़र तुम्हारी,

उससे भी आगे कदम धरो।

 

आज में कल के निर्माता बनो,

अपने समय के तुम शिल्पकार बनो,

हर चुनौती को अवसर समझो,

अपने जीवन के खुद आधार बनो।

 

ऊर्जा के तुम अटूट भंडार,

साहस का साकार रूप बनो,

ठोकरों से घबराना कैसा,

गिरकर फिर से मजबूत बनो।

 

तुम ही हो कल का उगता सूरज,

विश्वास का परचम ऊँचा करो,

अंधेरों को चीरती किरण बन,

हर दिल में उजाला भरो।

 

नौनीहालों, यूँ ही खिलते रहो,

मासूमियत का मान बनो,

माँ-बाप की आँखों का सपना,

उनकी सबसे बड़ी पहचान बनो।


Sunday, March 29, 2026

ग़ज़ल

 

हयात हार--फ़तह का कोई खेल नहीं ,
ये कारवाँ--वक़्त है, इसका कोई मेल नहीं

जो कुछ भी है यहाँ, सब फ़ानी हक़ीक़तें ,
किसी भी शय में बक़ा का कोई सिलसिला नहीं

हर इक मुस्कुराहट में ग़म की परतें पोशीदा,
कोई भी चेहरा यहाँ आइना--दिल नहीं

गुज़र रहा है हर लम्हा रेत की मानिंद,
किसी के क़ब्ज़े में ठहराव का पल नहीं

ताल्लुकात के धागे भी कितने कमज़ोर निकले,
कि इनको बाँध सके ऐसा कोई हल नहीं

ख़ल्वत में जो मिला, वो अंजुमन में कहाँ मिलता,
ये तन्हाई भी दरअस्ल कोई महफ़िल नहीं

अजल का हुक्म है आना भी और जाना भी,
इस अम्र से जहाँ में कोई भी ग़ाफ़िल नहीं

आख़िर में बस यही इद्राक काफ़ी हैआनन्द”,
कि ज़ीस्त जी ली अगर, तो कोई हासिल नहीं


उर्दू शब्द और हिंदी अर्थ

ख़ल्वत - तन्हाई , हयात - ज़िन्दगी , फ़ानी- नश्वर , पोशीदा-रहस्य , ग़ाफ़िल- बेसुध , इद्राक- चेतना ,ज़ीस्त- जीवन