उठो,
जागो,
सज हो जाओ,
पार्थ,
एक नया कुरुक्षेत्र तैयार है।
यहाँ तुम्हारे साथ,
सारथी कृष्ण नहीं होंगे,
यह युद्ध तो तुम्हें,
बस अकेले लड़ना होगा।
तुम्हारी पढ़ाई तुम्हारा धनुष है,
तुम्हारी स्किल प्रत्यंचा,
तुम्हारा अनुभव तुम्हारा तूणीर है,
और सवालों के उत्तर बाण।
जितना भेद पाओगे,
उतना ही तुम्हारी जॉब पक्की,
और हाँ, सैलरी नेगोशिएशन में
हिचकना नहीं,
क्योंकि जॉब के इस कुरुक्षेत्र में
आगे इन्क्रीमेंट की कोई गारंटी नहीं।
उठो,
जागो,
और अपना सी.वी. अपडेट करो,
और उतर जाओ इस कुरुक्षेत्र में।
यहाँ रिश्ते नहीं,
तुम्हारी काबिलियत बोलेगी,
तुम्हारी डिग्री नहीं,
तुम्हारी स्किल तौली जाएगी।
हर इंटरव्यू एक रणभूमि है,
हर सवाल एक चुनौती,
हर असफलता एक सीख है,
और हर प्रयास
अगली जीत की तैयारी।
यहाँ कोई अर्जुन बनने नहीं आएगा,
तुम्हें खुद अपना गांडीव उठाना होगा,
अपने लक्ष्य पर नजर रखनी होगी,
और हर बार
खुद को पहले से बेहतर बनाना होगा।
समय का पहिया घूम रहा है,
बाजार की चाल बदल रही है,
कल की सबसे बड़ी स्किल,
आज पुरानी पड़ रही है,
और आज की जरूरत,
कल शायद कोई और होगी।
इसलिए ठहरना मत,
सीखते रहो,
बढ़ते रहो,
अपने हुनर की धार
हर दिन तेज करते रहो।
क्योंकि इस नए कुरुक्षेत्र में
विजय उसी की होगी,
जो परिस्थितियों को दोष नहीं देगा,
बल्कि परिस्थितियों के साथ
खुद को बदलता रहेगा।
तो उठो पार्थ,
अपने भीतर के योद्धा को जगाओ,
लक्ष्य को आँखों में बसाओ,
अपने हुनर को हथियार बनाओ,
और निकल पड़ो...
क्योंकि इस बार
कृष्ण सारथी नहीं होंगे,
कोई और तुम्हारा रथ नहीं हाँकेगा।
और याद रखना -
इस नए कुरुक्षेत्र में
रथ भी तुम्हारा,
सारथी भी तुम,
धनुष भी तुम्हारा,
बाण भी तुम।

