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Friday, March 6, 2026

बसंत

 


मंद समीर सुहावनी, डोले तरु की डाल,
कोयल मीठे राग में, गाए नवल धमाल।

पीत वसन धरती धरे, सरसों हँसे अपार,
भ्रमर गुंजारें फूल पर, छाए मधु के हार।

नव पल्लव की छाँव में, जग का बदले रूप,
जीवन में आशा जगे, जैसे फैली बिखरी धूप।

ऋतुराज के आगमन से, खिल उठे सब प्राण,
प्रेम-सुगंधित हो उठे, मन, उपवन, और त्राण।