Tuesday, June 2, 2026

चिंतन

 


चिंता नहीं ,चिंतन होना चाहिए ,

भविष्य हमें कैसे चाहिए ,

दुनिया जिन हालातों से गुजर रही है ,

इस बात पर मंथन होना चाहिये। 

 

जिस रफ़्तार से बदल रही दुनिया ,

पुरानी परिपाटियाँ ध्वस्त हो रही ,

नये परिपेक्ष्य में कैसी हो दुनियाँ ,

इस बात पर मंथन होना चाहिये। 

 

जो पहले कल्पना था , अब यथार्थ है ,

मानव स्वभाव लेकिन  बदला नहीं है ,

लग रहे है उसके हाथ अस्त्र -शस्त्र नए ,

उपयोगों पर उनके मंथन चाहिये। 

 

रिश्ते नातों की नींव भी दरक रही ,

सबको समाज बस नाम के लिए चाहिये ,

ऑनलाइन समाज की नयी दुनिया बस चुकी ,

उस समाज की नींव पर चिंतन चाहिये।

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