कुछ ऐसा लिखो आनन्द अब ,
जो ए आई भी न लिख पाये ,
कुछ ऐसे सवाल बूझो ,
जो गूगल के पास भी न हो ,
नया कुछ ही अंतर पैदा करेगा ,
ए आई और तुम्हारी लेखनी में ,
अभी भी बहुत उम्मीद बची है ,
ए आई वही लिखेगा ,
जो अब तक लिखा जा चुका है ,
गूगल अब भी उन्ही प्रश्नों का उत्तर देगा ,
जो हल किये जा चुके है कभी ,
नया लिखने के लिये अभी भी बहुत है ,
और हजारों सवाल अब भी अनुत्तरित है ,
और यही अभी की "उम्मीद " है ,
ये उम्मीद और सम्भावना बहुत बड़ी है,
इंसानो की बुद्धि और रचनात्मकता की ,
अभी तक तो कोई सीमा नहीं हैं ,
मजे की बात तो ये है " आनन्द "
ए आई और गूगल सब ,
उसी करामाती ढाई सौ ग्राम के ,
मस्तिष्क की बानगी भर है,
ए आई अभी एक जमा एक को दो ही कहेगा ,
एक जमा एक को ग्यारह करने में अभी बहुत देर हैं।
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