Showing posts with label AI. Show all posts
Showing posts with label AI. Show all posts

Tuesday, June 9, 2026

ए आई और हम

 कुछ ऐसा लिखो आनन्द अब , 

जो ए आई भी न लिख पाये , 

कुछ ऐसे सवाल बूझो , 

जो गूगल के पास भी न हो , 

नया कुछ ही अंतर पैदा करेगा , 

ए आई और तुम्हारी लेखनी में , 

अभी भी बहुत उम्मीद बची है , 

ए आई वही लिखेगा , 

जो अब तक लिखा जा चुका है , 

गूगल अब भी उन्ही प्रश्नों का उत्तर देगा , 

जो हल किये जा चुके है कभी , 

नया लिखने के लिये अभी भी बहुत है , 

और हजारों सवाल अब भी अनुत्तरित है , 

और यही अभी की "उम्मीद " है , 

ये उम्मीद और सम्भावना बहुत बड़ी है, 

इंसानो की बुद्धि और रचनात्मकता की , 

अभी तक तो कोई सीमा नहीं हैं , 

मजे की बात तो ये है " आनन्द " 

ए आई और गूगल सब , 

उसी करामाती ढाई सौ ग्राम के  , 

मस्तिष्क की बानगी भर है, 

ए आई अभी एक जमा एक को दो ही कहेगा , 

एक जमा एक को ग्यारह करने में अभी बहुत देर हैं।  

Sunday, November 23, 2025

जेन ज़ी कविता

 

बातों ही बातों में कल मेरी बेटी बोली ,

पापा अब नई कवितायें लिखनी होगी ,

वैसे भी हमारी जेनेरशन कवितायें पढ़नी भूल रही ,

उनके हिसाब से अब लिखनी होंगी।

 

मन विचलित, मस्तिष्क परेशान ,

कहाँ से लाऊँ अब ये ज्ञान ,

मगर अब जुड़ना होगा तो ,

इस दौर की कवितायें लिखनी ही होंगी।

 

लगे हाथ उसने दे दिया एक सुझाव ,

आई का इस्तेमाल करो ,

प्रोम्प्ट देकर उससे अब ,

अपनी कवितायें रचने को कहो।

 

अब कवितायें भी आई लिख देगा ,

कवियों अब तुम्हारा क्या होगा ,

मानवीय संवेदनाओ को अब ,

आई अपने कृत्रिम भावों से सीचेंगा।

 

एक ही प्रोम्प्ट पर अलग -अलग रस की ,

वो झटपट नौ कवितायें रच  देगा ,

" आनन्द " तुम खेती करना सीखो अब ,

कवितायें तो तुमसे बेहतर आई लिख देगा।

Thursday, September 18, 2025

छलावा

शनैः शनैः हम इक ,

छलावे की दुनिया ,

असली समझ , 

गिरफ्त में आ रहे है , 

इस दुनिया का कोई , 

सिर पैर नहीं है , 

सब आभाषी , 

सब छदम , 

इसी दुनिया को अब , 

नई दुनिया समझ रहे है।  


डर इस बात का है सिर्फ , 

छदम या आभाषी दुनिया की , 

उम्र लंबी नहीं होती है , 

फिर जब टूटेगा भ्रम , 

तब तक शायद बहुत देर , 

हो चुकी होगी , 

और शायद इक पीढ़ी , 

भ्रम में ही खप चुकी होगी, 

नई पीढ़ी को फिर , 

सिफ़र से शुरुवात करनी होगी।  

Monday, August 11, 2025

ए आई ( कृत्रिम बुद्धिमता )


कितना अच्छा हो जायेगा , 

हमारा सब काम ए आई से हो जायेगा , 

हमारे सारे सवालों का उत्तर , 

ए आई बड़ी सटीकता से देगा , 

कितना अच्छा हो जायेगा , 

हम कही फँसे तो , 

ए आई हमें रास्ता दिखायेगा , 

कितना अच्छा हो जायेगा , 

बीमारी में वो हमें , 

सबसे अच्छी दवा सुझायेगा , 

कितना अच्छा होगा , 

हमारा हिसाब किताब भी वही रखेगा , 

कितना अच्छा होगा , 

जब वो हमारे सारे दिमागी काम , 

ए आई खुद कर देगा , 

कितना अच्छा होगा , 

स्कूलों में ए आई पढ़ायेगा , 

कितना आराम होगा , 

जब सारे मुश्किल प्रश्न , 

ए आई झटपट सुलझायेगा , 

कितना अच्छा होगा , 

जब वो हमारे अच्छे -बुरे सब में , 

हमारे साथ हमारे दोस्त की तरह होगा, 

कितना अच्छा हो जायेगा , 

जब ए आई का साथ ही काफी होगा , 

क्या फर्क पड़ेगा ? 

जब हम अपनी अक्ल का इस्तेमाल , 

करना भूल जायेंगे , 

दिमाग हमेशा स्थिर हो जायेगा , 

सोचने समझने के क्रम में जो , 

विकसित हुआ था मस्तिष्क हमारा , 

फिर से सिफ़र हो जायेगा , 

ए आई जिस दिन ठहरेगा , 

वही दिन क़यामत का दिन होगा।