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Monday, January 6, 2025

जकड़न

 जकड़न सिर्फ दिमाग में होती है ,

वर्ना इंसान के वश की क्या चीज नहीं  ,

जो भी हुआ है अभी तक संसार में ,

किया तो है किसी इंसान ने ही। 

 

हमने खुद जकड़ा है सीमाओं में  ,

कुव्वत की कोई थाह नहीं ,

धैर्य तो रखना ही होता है ,

"उस पर " भरोसे से बड़ा कोई भरोसा नहीं। 

 

सीमाओं से परे जिसने भी सोचा ,

वह शिलालेखों में अमिट हो गया ,

जो फैला न सका पँख अपने ,

वो न जाने कहाँ ग़ुम  हो गया। 

 

परिस्थितियों का तो सिर्फ बहाना है ,

बस जागने की ही तो बात है ,

लपक लिये जिसने अवसर समय पर ,

शिखर उसके लिए कोई मुश्किल नहीं। 

 

बाधाएँ सिर्फ दिमाग में है ,

वक्त कभी भी किसी के लिये गुजरा नहीं ,

चलना चाहे अगर कोई ,कभी भी ,

वक्त कहता है तू चल , देर कभी नहीं।

 

इक "ज़िन्दगी " मिली है आनन्द ,

इससे बढ़कर शायद कोई सौगात नहीं ,

यूँ ही काट दी गर तो ,

इससे बड़ा अन्याय कोई नहीं। 

Tuesday, February 5, 2019

मसले

बहुत मसले यूँ ही हल हो जाते ,
अगर " मैं " से "हम " हो जाते।  

कितने रिश्ते यूँ ही नहीं बिखरते , 
थोड़ा वो और थोड़ा तुम झुक जाते।  

पछतावा अब करने से क्या फायदा , 
उस समय जरा हिम्मत कर जाते।  

ज़िन्दगी की राह कितनी आसान हो जाती , 
अगर गलतियों से सबक सीखे होते।  

माना बहुत चुनौतियाँ है राह में , 
अपने दम ख़म को परखे तो होते।  

तमाम खूबियों से नवाजा ईश्वर ने आपको , 
वक्त रहते फैसले लेते तो आज कहाँ होते। 


Friday, January 11, 2019

अभिलाषा



जब सांझ आये जीवन की भगवन , 
बस इतनी कृपा हो , 
फक्र कर सकूं , सीना चौड़ा 
जीवन पर अपने गर्व हो।  

याद करूँ अपने जीवन पथ को , 
गर्व की अनुभूति हो , 
कर्मो के मेरे जीवन पथ  पर , 
कही कोई सिसकी न हो।  

याद करे अगर लोग तो , 
उनकी मधुर स्मृतियो में हो , 
ठेस पहुँचायी हो गर किसी को , 
वो भी भुलाने लायक हो।  

बंद मुट्ठी बाँधे जन्मा था , 
खाली हाथ ही जाना है , 
जीवनपथ का पथिक निरंतर , 
तुझ पर कभी संशय न हो।  

क्या हारा , क्या जीता 
क्या खोया , क्या पाया 
जीवन इससे उन्मुक्त , 
अपने जीवन पथ पर गर्व हो।

जीवन की उस साँझ में ,
शांति  और सुकून हो , 
जीवन जो दिया तूने , 
"भरपूर जीये"- तसल्ली हो। 

छायाचित्र आभार - गूगल 

Wednesday, December 5, 2018

मुस्कराइये , आप ज़िंदा है


माना की अँधेरे बहुत है , 
मगर रोशनी के लिए तो , 
एक जुगनू ही बहुत है।  

माना की दुश्वारियाँ बहुत है , 
मगर मुस्कराने के लिए तो , 
एक बहाना ही बहुत है।  

माना की हारे बहुत बार है , 
मगर पीठ थपथपाने के लिए , 
एक कदम भी चले है तो बहुत है।  

माना की कोई साथ नहीं है , 
मगर हौंसला देने के लिए , 
जूनून और ज़िद्द ही बहुत है।  

माना की सारे दुश्मन है , 
मगर अब भी वो बचपन का दोस्त ,
जिसे तुम भूल गए हो , बहुत है।  

माना की रातों की नींद गायब है , 
मगर सोने के लिए , 
माँ की  थपकी की याद ही बहुत है।  

माना की ज़िन्दगी थोड़ा कठिन है , 
मगर स्वस्थ हो , 
कदम बढ़ाने के लिए यही बहुत है।  

Friday, May 18, 2018

कारवाँ जारी है



जीवन अपनी गति से बढ़ रहा , 
कोई आगे - कोई पीछे चल  रहा ,
किसी के माथे पर थकन की शिकन , 
कोई मदमस्त गीत गुनगुना रहा , 
देखो !जीवन कारवाँ गुजर रहा।  

किसी को क्षितिज के उस पार की चिंता , 
कोई गुबार में उलझ रहा , 
किसी को सहारे की जरुरत , 
कोई अकेला ही चल रहा ,
देखो ! जीवन कारवाँ गुजर रहा।  

कही जेठ की धूप झुलसा रही , 
कहीं चाँद अपना अमृत बरसा रहा , 
बनते - बिगड़ते रिश्तो के बीच , 
प्रेम अपनी राह खुद बना रहा , 
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

सब उम्मीदों को सहारा बनाकर , 
यादों की गठरी उठाकर , 
अपने सफर को यादगार बनाने की कशमकश में ,
चला जा रहा,
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

किसी की ख्वाहिशें पनप रही , 
किसी को सफर लम्बा लग रहा , 
जो अँधेरे में भी साहस न छोड़े , 
उसका सफर आरामदायक कट रहा ,
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

राहों में कही फूल बिखरे पड़े , 
कही काटों से भी पाला पड़ रहा , 
संतुलित होकर जो चल रहा , 
इस कारवाँ का आनंद वही ले रहा , 
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

चलना अकेले ही है , कुछ साथ आ गए तो अच्छा है , 
कहकहे लगाते आगे बढ़ते रहिये ,
सुख -दुःख बाँटते हुए चलते रहिये, 
आपके पदचिन्हो पर वो देखो, 
कोई चल कर अब आगे बढ़ रहा , 
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

Monday, April 23, 2018

हर सुबह - नई रोशनी




कुछ उम्मीदें , कुछ आशाएँ
कुछ विश्वास लेकर रोज़ उठता हूँ ,
कल से बेहतर आज को बनाऊँगा ,
नयी सुबह का आगाज करता हूँ। 

दफ़न कर देता हूँ कड़वी यादों को बुरा सपना समझकर ,
अच्छी यादो को संजो लेता हूँ ,
निकल पड़ता हूँ हर रोज़ एक नए सफर में जैसे ,
इस तरह से मैं रोज़ अपना " कारवाँ जारी " रखता हूँ। 

मिलते है कई लोग मुझे ,
रोज़ कुछ न कुछ सीख लेता हूँ ,
मेरी ख़ुशमिज़ाजी का राज बस इतना सा हैं ,
दुसरो से ज्यादा अपेक्षा नहीं , खुद पर भरोसा रखता हूँ। 

जहाँ से सीख मिले , उसे भी अपनाता हूँ
पत्थर से टकरा जाऊं , तो फिर संभल कर चलता हूँ ,
जीवन उस खुदा का दिया अनमोल तोहफा है ,
"व्यर्थ" न चला जाये , हर मुमकिन कोशिश करता हूँ। 

Friday, April 6, 2018

सीख


सुलझाते रहो रिश्तो के धागे ,
बहुत महीन और नाजुक होते है ,
देर गर हो गयी तो ,
गाँठ बन जाते है।

बस चार दिन का बसेरा है ये जहाँ ,
किराये का घर है ,
अपना कुछ नहीं यहाँ ,
फिर कुछ खोने से क्या डर है?

कुछ भी स्थायी नहीं जगत में ,
वक्त जो आपके हाथ में है ,
उससे बढ़कर और कुछ भी नहीं  ,
जी लो बस " आज " को , क्यूंकि "कल" कभी आता नहीं। 

बेशक योजना बनाओ कल की ,
मगर उसके चक्कर में आज गँवाओ नहीं ,
ये वक्त है ,
एक बार हाथ से फिसला ,फिर लौटता नहीं। 

Tuesday, November 28, 2017

चलो , आगे बढ़ते है


चलो ,
आगे बढ़ते है ,
कड़वी यादो को दफ़न करते है ,
मीठी यादों के संग चलते है। 

चलो ,
आगे बढ़ते है ,
जो हो गया - वो हो गया ,
आगे का सफर तय करते है। 

चलो ,
आगे बढ़ते है ,
समय अभी हाथ से फिसला नहीं ,
जो बचा है उसी में इतिहास रचते है। 

चलो ,
आगे बढ़ते है ,
जो रिश्ते साथ में हैं ,
उनको संग ले चलते हैं। 

चलो ,
आगे बढ़ते है ,
जिंदगी ने अनुभव तो दे ही दिया ,
दिल को फिर जूनून देते है । 

चलो ,
आगे बढ़ते है ,
औरो के लिए बहुत जी लिए ,
अब अपने लिए भी जीते हैं। 

चलो ,
आगे बढ़ते है ,
नए जोश और उमंग से ,
नयी उच्चाईयाँ छूते है।  

Tuesday, November 7, 2017

मुकद्दर



मुकद्दर जागेगा इक दिन , 
मैं मेहनत से क्यों हार मानू।  

मंज़िल मिलेगी इक दिन , 
मैं रोज़ सीढ़ियाँ तो चढ़ूँ।  

समय बदलेगा जरूर इक दिन , 
मैं समय की इज्जत तो करूँ।  

सफलता - असफलता तो परिणाम है कर्मो का , 
चलने से पहले ही इन सबसे क्यों डरूँ।  

कर्मो पर ही मेरा नियंत्रण है , 
सिर्फ किस्मत के सहारे ही क्यों बैठूँ।  

जीवन सिर्फ सेज नहीं फूलो की , 
काँटों से फिर क्यों डरूँ।  

प्रारब्ध जो भी होगा मेरा , 
मैं उस खुदा पर भरोसा तो रखूँ।  

Wednesday, October 11, 2017

ज़िन्दगी

हर किसी के लिए ज़िन्दगी के मायने अलग ,
किसी के लिए चक्रव्यूह ,
किसी के लिए मृगतृष्णा ,
किसी के लिए काँटो का ताज ,
किसी के लिए फूलो की सेज ,
किसी के लिए संघर्ष गाथा ,
किसी के लिए भाग्य का खेल,
किसी के लिए अंतहीन दौड़ ,
किसी के लिए मोक्ष ,
किसी के लिए प्यार -मोहब्बत ,
किसी के लिए रंजिश का सफर ,
हर किसी के लिए ज़िन्दगी के मायने अलग।

गरीब के लिए दो वक्त की रोटी ,
अमीर के लिए ऐशो आराम का जीवन ,
प्रेमी के लिए प्रेयसी ,
प्रेयसी के लिए प्रेमी जीवन ,
रोगी के लिए स्वास्थ्य ,
निरोगी के लिए भरपेट भोजन ,
माँ के लिए उसके बच्चे जीवन ,
पिता  के लिए बच्चो का भविष्य जीवन ,
दोस्तों के लिए दोस्ती ,
दुश्मनो के लिए दुश्मनी ,
हर किसी के लिए ज़िन्दगी के मायने अलग,
ऐ ! ज़िन्दगी तेरे इतने रूपों को नमन। 

कलाकार के लिए रंगमंच ,
खिलाडी के लिए खेल ,
कवि के लिए कविता ,
लेखक के लिए कहानी ,
नेता के लिए कुर्सी ,
किसान के लिए फसल ,
छात्रों के लिए पढाई ,
बच्चो के लिए मौज मस्ती
नौकरीपेशा के लिए सैलरी ,
बेरोजगारो के लिए नौकरी ,
सैनिको के लिए देशभक्ति ,
एक ज़िन्दगी , कितने रंग ,
शायद इसलिए कहते है रंगीन ज़िन्दगी। 

कोई इसे क्षणभंगुर कहता ,
कोई ठोस धरातल ,
कोई नदी की संज्ञा देता ,
कोई कहता मरुस्थल। 
कोई कहता खूबसूरत ,
कोई कहता दलदल ,
कोई कहता आज़ादी ,
कोई कहता सफर।    
किसी के लिए जिम्मेदारियां ,
कोई अपने में ही मस्त मगन ,
ज़िन्दगी एक , रूप अनेक ,
ज़िन्दगी देने वाले तुझे शत शत नमन। 

मेरी नजर में बहती नदी है ज़िन्दगी ,
कही से शुरू होकर ,
कही दूर सागर में मिलना है ज़िन्दगी ,
इस सफर में कही चंचलता ,
कही ठहराव ,
कही तेज बहाव ,
कही गहराई ,
कही कंकड़ पत्थरो  में लुढ़कती ज़िन्दगी ,
कही पूजा योग्य ,
कही तिरस्कृत ,
कही उफान ,
कही शांतचित ,
लेकर अपने साथ कितने अनुभव ,
कुछ खट्टे , कुछ मीठे ,
सागर में मिलने से पहले ,

अविरल बहाव ही शायद है ज़िन्दगी।  

Monday, May 29, 2017

सफरनामा



कुछ पाने की खातिर निकला, 
पीछे बहुत कुछ छूट गया , 
ज़िन्दगी को बेहतर बनाने निकला , 
ज़िन्दगी का मतलब भूल गया।  

अब रोज़ फासले बढ़ते जा रहे हैं , 
हम मशीन बनते जा रहे हैं , 
जिस ज़िन्दगी को पाने निकले थे इक दिन , 
उससे दूर रोज़ जा रहे हैं।  

खुशियाँ मिल रही हैं जरूर , 
मगर न जाने क्यू फीकी सी लग रही हैं , 
शायद इस भागभागम में , 
"डायबिटीज " हो गयी हैं।  

Friday, April 7, 2017

लेखन यात्रा



निकल पड़ा हूँ लेखन यात्रा में ,
लिए शब्दों का पिटारा ,
भावनाओ की स्याही हैं ,
कलम ही मेरा सहारा।

लिखूंगा , और बेबाक लिखूंगा ,
गद्य लिखूंगा -पद्य लिखूंगा ,
कभी कल्पनाओ में गोते ,
और कभी सच को धार दूँगा।

कभी आपको हँसाऊंगा ,
कभी शायद पलके नम करूँगा ,
यायावर बनकर अब ,
ज़िन्दगी के और नजदीक पहुँचूंगा।

मिलेंगे अपने जैसे मुझे और कई ,
शब्दों का जाल बुनता रहूँगा  ,
जीवन के इस नए सफर में ,
शायद ज़िन्दगी का सार मिलेगा।

अच्छा लगे तो हौंसला देते रहिएगा ,
बुरा लगे तो भी बताइयेगा ,
इस यात्रा में हो सके तो ,
मेरा साथ देते रहियेगा।  

Monday, January 2, 2017

खुद की , खुद से ........( 2017 की पहली कविता )

 



क्या हैं ? हम में वो जुनून और वो जज्बा की
हम खुद से मुकाबला करे
रोज़ अपने लिए कुछ पैमाने तय करे औरऔर उन पर खरा  उतरे
अपने लिए खुद नियम बनाये और उन पर अमल करे
क्यूंकि हमें दुसरो की नक़ल नहीं करनी
हमारा तो खुद से मुकाबला हैं
अपने को बेहतर से और बेहतर करने की जंग
हमारे ही भीतर तो हैं। 

हमें हमारी सोच बदलनी होगी
अपने पंखो को परवाज देनी होगी
खुला आसमान हैं ये जहाँ
क्षितिज की तलाश हमें खुद करनी होगी ,
  रुकना होगा , झुकना होगा 
अपने लक्ष्यों तक अपने जूनून से पहुचना होगा ,
 लगेगी थोडा देर भले ही ,
हार ने मानने का जज्बा रखना होगा
हिम्मत  रखनी पड़ेगी दुनिया बदलने की
हर हालात में मुस्कराये ये कलेजा रखना होगा। 

दुनिया हमें पागल कहे तो भी अपना रास्ता खुद चुनना होगा
सफलता और असफलता को बिना ध्यान में रखे
हमें  अविरल बहना होगा,  
भेडचाल में चल के बहुत देख लिया अब
अपने लिए खुद का  मुकम्मल जहाँ बनाना होगा ,
 अपने ज़िन्दगी कारवां को हमें
और बेहतर बनाना होगा। 


Friday, July 29, 2016

ज़िन्दगी उत्सव



कहीं खुशियों के रेले -और कहीं थोड़ा गमो के झमेले हैं ,
कहीं प्यार की बरसात  हैं - कही थोड़ा तकरार हैं ,
हर ज़िन्दगी का कोई न कोई रंग ,
यहाँ हर तरफ ज़िन्दगी के मेले हैं। 

कोई यहाँ दौड़ रहा - कोई अलमस्त हैं ,
कोई कल की फिक्र में व्यस्त हैं ,
किसी के चेहरे पर उदासी - कोई खिलखिला कर हँस रहा हैं ,
कोई भीड़ में भी अकेला - कोई अकेला ही मस्त हैं ,
ज़िन्दगी उत्सव के देखो कितने अनगिनत रंग हैं। 

हर कोई शामिल हैं इस उत्सव में - गठरी अपनी उम्मीदों की बाँधे हैं ,
घूम रहा हैं इस उत्सव में - अपना रंग बिखेरे हैं ,
आओ ! शामिल हो जाओ जीवन उत्सव में ,
सबके लिए यहाँ बहुत कुछ हैं।  

Saturday, April 9, 2016

जीवन कारवां का एक पड़ाव


पहुँच गया हैं मेरे जीवन का कारवां एक पड़ाव पर , सोचता हूँ थोड़ा आराम कर लेता हूँ !
गठरी मेरी यादो की जरा भारी हो गयी हैं , थोड़ा इसको हल्का कर लेता हूँ !!

अच्छी यादो को फिर से गठरी में करीने से रखता हूँ !
और कड़वी यादो को अब यही छोड़ चलता हूँ !!

जो सबक सीखे हैं उन्हें जरा तरोताजा कर लेता हूँ !
गलतियां जो की हैं उन्हें न दोहराने की शपथ लेता हूँ !!

अब कारवां का सफर थोड़ा मुश्किल है , जिम्मेदारियों का असर ज्यादा हैं !
अब तक तो सिर्फ अपने लिए जिया , अब थोड़ा दूसरों के लिए जीने की कोशिश करता हूँ !!

अभी तक के सफर के लिए , ज़िन्दगी का तहेदिल से शुक्रिया करता हूँ !
जो बिछड़  गए इस कारवां में  , जरा आँखे बंद कर उन्हें याद कर लेता हूँ !!

किसी की आँखों में अगर मेरी वजह से आँसू आये हो तो पश्च्ताप कर लेता हूँ !
किसी की वजह से मेरा दिल दुःखा हो तो उसे माफ़ करता हूँ !!

खोने पाने का हिसाब करने से कोई फायदा नहीं हैं !
लाया ही क्या था ? ये गैर जरुरी सा हैं !! 

फिर नए उत्साह और उमंग से मुझे आगे बढ़ना  हैं !
अपने तजुर्बे और थोड़े ज्ञान का इम्तेहान देना हैं !!

कितने लोगो से और मिलना और सीखना हैं  !
जीवन कारवां का आगे का सफर ख़ुशी ख़ुशी तय करना हैं !! 

Thursday, March 31, 2016

एक सन्देश ...................



मन में तसल्ली  और दिमाग में सुकून रखिये,
ईश्वर पर अटूट आस्था और दिल  में धैर्य रखिये !

जो हैं उसका मजा लीजिए , जो नहीं हैं उसके लिए प्रयत्न कीजिये ,
इच्छाओं की कोई थाह नहीं होती , इंद्रियों को थोड़ा काबू में रखिये !!

जो बीत गया उसके लिए गम मत कीजिये , जो है उसमे खुश रहना सीखिए ,
भविष्य अच्छा हो , अपना कर्म करते रहिये !

प्यार , स्नेह और मुस्कराहट फैलाते रहिये ,
अपनी तरफ से सबका अच्छा सोचते रहिये !!

सीखने  की ललक को बनाए रखिये ,
अपने स्वास्थ्य का अच्छा ख्याल रखिये !

भागदौड़ बहुत हैं ज़िन्दगी में - मगर दो चार पल अपने लिए दीजिये ,
अपनों को आपकी बहुत जरुरत हैं - रिश्तों में गर्माहट बनाए रखिये !!

अपने हौंसले के धनुष पर विश्वास के तीर चलाते रहिये ,
ज़िन्दगी ईश्वर का उपहार हैं आपको , जिंदादिली से भरपूर जीते रहिये !

करते रहिये कुछ काम ऐसे - ज़िन्दगी के नए पैमाने गढ़ जाइये ,

ज़िन्दगी की किताब में अपना  नाम भी दर्ज कीजिये!!