सफर तो अकेले का ही है ,
अकेले ही तय करना है ,
मिलते -बिछुड़ते रहेंगे हर मोड़ पर ,
मंज़िल तक पहुँचना अकेले ही है।
मायने बस यह रखता है ,
मिलने -बिछुड़ने वालों से ,
क्या आपने सीखा ,क्या सिखाया ,
क्या यादें दी , क्या यादों का जखीरा बनाया।
निकल पड़ा हूँ लेखन यात्रा में , लिए शब्दों का पिटारा ! भावनाओ की स्याही हैं , कलम ही मेरा सहारा !!
सफर तो अकेले का ही है ,
अकेले ही तय करना है ,
मिलते -बिछुड़ते रहेंगे हर मोड़ पर ,
मंज़िल तक पहुँचना अकेले ही है।
मायने बस यह रखता है ,
मिलने -बिछुड़ने वालों से ,
क्या आपने सीखा ,क्या सिखाया ,
क्या यादें दी , क्या यादों का जखीरा बनाया।
तुम मिलोगे दुबारा ?
मैं नहीं जानता ,
मगर उम्मीद है ,
ज़िन्दगी के किसी न किसी ,
मोड़ पर ,
हम फिर टकरायेंगे ,
वो बात अलग होगी ,
तुम भी न जाने कितना सफर,
तय कर आये होगे,
और मैं भी ,
मगर विश्वास तब तक ,
कायम रहेगा फिर मिलने का ,
जब तक ये दुनिया गोल रहेगी।