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Thursday, February 15, 2024

बात पते की

 

दादी एक बात कहती थी ,

उस समय समझ नहीं आती थी ,

वो कहती थी - अक्ल और ,

उम्र की भेंट अक्सर नहीं होती ,

जिनकी होती है -वो पार हो जाते है ,

जिनकी नहीं होती वो बस पछताते है ,

बात सीधी और सरल सी थी ,

अपने में पूरा सार समेटे थी ,

जीवन का सारा खेल ही ,

अक्ल और उम्र पर टिका है ,

सही उम्र पर अक्ल आ जाए ,

तो पूरा जीवन सफल हो जाता है ,

वर्ना फिर जीवन की मथनी में ,

वो पिसता चला जाता है,

दादी एक बात कहती थी ,

उस समय समझ कहाँ आती थी ,

वो कहती थी -अभी समझ नहीं आयेगा ,

जब आयेगा -  बहुत देर हो चुकी होगी ,

और ये लाख टके की बात थी,

अब सोचों तो कितना सच कहती थी। 

Saturday, May 21, 2022

विश्वास

 

गर इच्छा शक्ति मजबूत तो डर वाजिब नहीं।

मन के विश्वास के सामने कोई मुश्किल नहीं ।1।

 

आत्मबल ने लिखी है विजय की इबारते कई।

तप कर ही निकलता है हीरा खदानों से कहीं ।2।

 

मुश्किलें तो आयेंगी कदम दर कदम पथ पर। 

करे पार बाधाएँ जो विजेता कहलाता भी वहीं ।3।

 

परिस्थितयाँ जाँचती है , तोलती है , परखती है । 

गिरे , संभले , चले - जीवटता की पहचान यही ।4।

 

ज़िन्दगी सिर्फ इक बार मिली है , महसूस कर। 

सार्थक तभी जब पदचिन्हो पर चले कोई ।5। 

 

Friday, April 7, 2017

लेखन यात्रा



निकल पड़ा हूँ लेखन यात्रा में ,
लिए शब्दों का पिटारा ,
भावनाओ की स्याही हैं ,
कलम ही मेरा सहारा।

लिखूंगा , और बेबाक लिखूंगा ,
गद्य लिखूंगा -पद्य लिखूंगा ,
कभी कल्पनाओ में गोते ,
और कभी सच को धार दूँगा।

कभी आपको हँसाऊंगा ,
कभी शायद पलके नम करूँगा ,
यायावर बनकर अब ,
ज़िन्दगी के और नजदीक पहुँचूंगा।

मिलेंगे अपने जैसे मुझे और कई ,
शब्दों का जाल बुनता रहूँगा  ,
जीवन के इस नए सफर में ,
शायद ज़िन्दगी का सार मिलेगा।

अच्छा लगे तो हौंसला देते रहिएगा ,
बुरा लगे तो भी बताइयेगा ,
इस यात्रा में हो सके तो ,
मेरा साथ देते रहियेगा।  

Monday, January 2, 2017

खुद की , खुद से ........( 2017 की पहली कविता )

 



क्या हैं ? हम में वो जुनून और वो जज्बा की
हम खुद से मुकाबला करे
रोज़ अपने लिए कुछ पैमाने तय करे औरऔर उन पर खरा  उतरे
अपने लिए खुद नियम बनाये और उन पर अमल करे
क्यूंकि हमें दुसरो की नक़ल नहीं करनी
हमारा तो खुद से मुकाबला हैं
अपने को बेहतर से और बेहतर करने की जंग
हमारे ही भीतर तो हैं। 

हमें हमारी सोच बदलनी होगी
अपने पंखो को परवाज देनी होगी
खुला आसमान हैं ये जहाँ
क्षितिज की तलाश हमें खुद करनी होगी ,
  रुकना होगा , झुकना होगा 
अपने लक्ष्यों तक अपने जूनून से पहुचना होगा ,
 लगेगी थोडा देर भले ही ,
हार ने मानने का जज्बा रखना होगा
हिम्मत  रखनी पड़ेगी दुनिया बदलने की
हर हालात में मुस्कराये ये कलेजा रखना होगा। 

दुनिया हमें पागल कहे तो भी अपना रास्ता खुद चुनना होगा
सफलता और असफलता को बिना ध्यान में रखे
हमें  अविरल बहना होगा,  
भेडचाल में चल के बहुत देख लिया अब
अपने लिए खुद का  मुकम्मल जहाँ बनाना होगा ,
 अपने ज़िन्दगी कारवां को हमें
और बेहतर बनाना होगा।