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Thursday, February 15, 2024

बात पते की

 

दादी एक बात कहती थी ,

उस समय समझ नहीं आती थी ,

वो कहती थी - अक्ल और ,

उम्र की भेंट अक्सर नहीं होती ,

जिनकी होती है -वो पार हो जाते है ,

जिनकी नहीं होती वो बस पछताते है ,

बात सीधी और सरल सी थी ,

अपने में पूरा सार समेटे थी ,

जीवन का सारा खेल ही ,

अक्ल और उम्र पर टिका है ,

सही उम्र पर अक्ल आ जाए ,

तो पूरा जीवन सफल हो जाता है ,

वर्ना फिर जीवन की मथनी में ,

वो पिसता चला जाता है,

दादी एक बात कहती थी ,

उस समय समझ कहाँ आती थी ,

वो कहती थी -अभी समझ नहीं आयेगा ,

जब आयेगा -  बहुत देर हो चुकी होगी ,

और ये लाख टके की बात थी,

अब सोचों तो कितना सच कहती थी। 

Thursday, December 8, 2022

प्रयास

 उम्मीद तब तक मत छोड़ो , 

जब तक अंतिम प्रयास न हो जाये, 

और अंतिम प्रयास ऐसा करो , 

वो प्रयास का पर्याय हो जाय। 


फँसे हो कभी घुप्प अंधेरों में , 

कोई जुगनू ही सहारा हो जाये , 

हो हार निश्चित तब भी , 

एक पुरजोर कोशिश की जाय।  


दुःखों का भँवरजाल हो सामने , 

"खड़े हो ", इसी का जश्न मनाया जाये , 

सफलता - असफलता जो मिले राहों में , 

"स्वीकार कर" , आगे बढ़ा जाय।   


सफर बढ़ रहा रोज़ आगे , 

क्या फर्क पड़ता है - कौन आगे , कौन पीछे 

जहाँ भी ख़त्म हो  सफर अपना  , 

वहाँ एक " शिलालेख " गढ़ जाय।  

Saturday, May 21, 2022

विश्वास

 

गर इच्छा शक्ति मजबूत तो डर वाजिब नहीं।

मन के विश्वास के सामने कोई मुश्किल नहीं ।1।

 

आत्मबल ने लिखी है विजय की इबारते कई।

तप कर ही निकलता है हीरा खदानों से कहीं ।2।

 

मुश्किलें तो आयेंगी कदम दर कदम पथ पर। 

करे पार बाधाएँ जो विजेता कहलाता भी वहीं ।3।

 

परिस्थितयाँ जाँचती है , तोलती है , परखती है । 

गिरे , संभले , चले - जीवटता की पहचान यही ।4।

 

ज़िन्दगी सिर्फ इक बार मिली है , महसूस कर। 

सार्थक तभी जब पदचिन्हो पर चले कोई ।5। 

 

Saturday, October 12, 2019

जीवन समर


उतरे है जीवन समर में , 
तो डरना क्या , 
दिया है सिर ओखली में , 
तो मूसल से डरना क्या , 
कर्मो का परिणाम है वर्तमान , 
भविष्य के लिए घबराना क्या , 
मुकद्दर खुद लिखना होता है , 
दुसरो पर दोष मढ़ना क्या ,
जिद्द हो , जूनून हो 
तो क्या पर्वत , क्या आसमान 
क्या सागर की गहराइयाँ 
बैठे रहे तो फिर , 
सपाट रास्ते में भी खाइयाँ।  

हौंसला और विश्वास , 
और कर्म हो अगर साथ , 
भाग्य का बनना और बिगड़ना क्या , 
पुरषार्थ के आगे बेदम है , 
सब बाधाएँ और संकट , 
कर्मतप से पिघल जाये लोहा भी , 
जयगान जीवन का।  

Sunday, July 14, 2019

यूँ ही बेवजह

यूँ ही बेवजह ज़िन्दगी को , 
मत उलझाइए , 
सीधी और सरल है , 
बस चलते जाइये।  

जो मिलेगा , 
वो मुकद्दर , 
जो नहीं मिलेगा , 
उस पर किसी और का हक़ , 
अपनी तरफ से , 
मंजिल की ओर , 
कदम बढ़ाते जाइये।  

दे अगर साथ कोई , 
नसीब आपका , 
नहीं तो , 
अकेले ही , 
चलते जाइये।  

हार जीत , 
सफलता असफलता , 
खोना -पाना ,
मन के भाव है , 
सीख कर कुछ फलसफे , 
मुस्कराहट होठों पर लेकर , 
आगे बढ़ जाईये।  

ये ज़िन्दगी है , 
रोज़ नए रंग दिखायेगी , 
कूची आपके हाथ में , 
अपने जीवन का चित्र, 
खुद बनाइये।  

Friday, May 24, 2019

जीत


जीत , 
चाहे छोटी हो या , 
बड़ी , 
सब कुछ छुपा लेती है , 
कमियाँ , 
खामियाँ , 
अवगुण , 
क्यूंकि , 
जीत की परत , 
बहुत मोटी होती है , 
वह सब कुछ, 
अपने नीचे , 
छुपाकर , 
बस , 
ऊपरी सतह पर , 
मेहनत , 
जज्बा , 
जूनून , 
और हौंसला , 
दिखाती है, 
जीत , बस , 
जीत होती है , 
और , 
बहुत जरुरी होती है।   

Wednesday, December 19, 2018

शिखर


वो यूँ ही शिखर पर नहीं पहुँचा होगा ,
कितना संघर्ष ,
कितना त्याग ,
कितने ताने ,
कितनी मेहनत ,
हर सीढ़ी पर अपना कलेजा रखा होगा ,
वो यूँ ही शिखर पर नहीं पहुंचा होगा। 

वो जज्बा ,
वो हिम्मत ,
वो जूनून ,
वो पागलपन ,
वो खुद पर विश्वास हर कदम रखा होगा ,
वो यूँ ही शिखर पर नहीं पहुंचा होगा। 

सीखने की ललक ,
हर हार से सबक ,
निराशा में आस की किरण,
हार में जीत की झलक,
हर परिस्थिति से पार पाया होगा ,  
वो यूँ ही शिखर पर नहीं पहुंचा होगा।  

Monday, December 10, 2018

सुनो , आपसे कुछ कहना है



सुनो , आपसे कुछ कहना है
हाँ , हाँ , आपसे से ही ,
इधर उधर बगले मत झांको ,
तुम्हारे सिवाय और किसी से नहीं ,
आज और अभी कुछ कहना है। 

तुम जो इतना व्यस्त दिखा रहे हो खुद को ,
उतना तुम हो नहीं ,
जबरदस्ती की कोशिश मत करो ,
आज मुझसे पल्ला छुड़ाने की। 

सबके लिए समय है तुम्हारे पास ,
क्या मेरे लिए कुछ भी नहीं ,
चौबीस घंटे साथ रहता हूँ तुम्हारे ,
फिर भी तुम्हे मेरी कोई क़द्र नहीं। 

किसी दिन रूठ गया ना ,
बहुत पछताओगे ,
ये जो नौटंकी रोज करते हो ना ,
फिर कभी न कर पाओगे। 

दिल हूँ तुम्हारा ,
कभी मेरी भी सुन लिया करो ,
कभी कभी मुझसे भी ,
एकांत में मिल लिया करो। 

बहुत समय से हम एक दूसरे से  मिले नहीं ,
इसलिए तुम खुश कम और परेशान ज्यादा रहते हो ,
दिमाग के बहकावे में हर समय गुलाम से रहते हो ,
मिलो कभी  हम तुम्हे " खुद से " मिलवाते है।