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Wednesday, February 18, 2026

उम्मीद

 

कुम्ल्हा जाता है शीत में ,

सर्द हवाओं के थपेड़े झेलता है ,

गिरा देता है पत्तियाँ सब ,

बसंत की उम्मीद में जी जाता है। 

 

पहली बसंत की हवा में ,

कपोल फूट पड़ती है ,

ठूँठ सा बना पड़ा था जो ,

पत्तियों से तन ढाँक लेता है। 

 

फिर खिलने लगते है फूल ,

कलरव होने लगता है ,

झूम -झूम कर बासंती हवा में ,

सर्द हवाओं का खौफ भूल जाता हैं। 

 

फिर आता है तपिश का मौसम ,

सूरज आग बरसाता है ,

मुरझा जाती है पत्तियाँ डाल डाल ,

चौमास के इंतजार में जी जाता हैं। 

 

पहली फुहार में रोम रोम ,

फिर से जैसे जी उठता है ,

अठखेलियाँ सा करता बूँदो संग ,

लहराता सावन के गीत गाता हैं। 

 

साल दर साल का चक्र यह ,

नये -नये अनुभव कराता है ,

घबराओ मत -नन्हे पौधों ,

जीवन का पाठ खुद सीख, बताता हैं।  

Saturday, March 1, 2025

प्रवाही जीवन

 

सरल , सहज और प्रवाही जीवन ,

कठिन ,उलझा और रुका हुआ मन ,

इच्छाएँ अनेक  , साधन सीमित ,

जग बौराया ,  चिंताएँ अनंत।

 

ऊबड़खाबड़ रास्ते , दौड़ अंधाधुंध ,

साँसो की नाजुक डोर पर टिका नन्हा तन ,

किस्मत और कर्मों की जोर आजमाइश ,

कुछ पल सुकून को तरसता जीवन।

 

उपाय क्या है जिससे आसान बने जीवन ,

कर्म किये जा , न कर फल की चिंता ,

भरोसा रख , उम्मीद जगा , कम कर ईच्छा ,

वक्त को इज्ज़त बख्श , हर हाल मुस्करा।

 

स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है , नसीब जगा ,

धीरे -धीरे ही सही , मंजिल की तरफ कदम बढ़ा ,

बहुत उलझनों में खुद को न उलझा ,

एक राह पकड़ बस , उसी पर चलते जा।

Friday, December 20, 2024

मेरी कवितायेँ

 

कहीं भावनाओ का आवेश है ,

कुछ शब्दों  में आक्रोश है ,

कुछ पंक्तियाँ मरहम सी लगाती ,

कुछ भावनाओं का आवेग है। 

 

कुछ शब्द जोश बढ़ाते ,

कुछ पंक्तियाँ जीवन दर्शन कहती ,

कही कुंठाओं का शोर गूँजता ,

किन्ही पंक्तियों से  मुस्कान तैरती।  

 

न रेल जैसा थरथराता हूँ ,

न ट्रक जैसा शोर करता हूँ ,

न कार जैसा आरामदायक ,

न प्लेन जैसा आसमां चीरता हूँ ।

 

कही उम्मीद की लौ ,

कही अवसाद चीरता हूँ ,

जीवन मर्मों को समझने के क्रम में ,

रोज़ कुछ लिखता और मिटाता हूँ। 

 

"शब्द " तीर है और "कलम " धनुष ,

भावनाओं का तूणीर संग रखता हूँ ,

"जीवन " का समर क्षेत्र है ,

अपने "कारवाँ " को रोज़ ज़िंदा रखता हूँ। 

Thursday, December 8, 2022

प्रयास

 उम्मीद तब तक मत छोड़ो , 

जब तक अंतिम प्रयास न हो जाये, 

और अंतिम प्रयास ऐसा करो , 

वो प्रयास का पर्याय हो जाय। 


फँसे हो कभी घुप्प अंधेरों में , 

कोई जुगनू ही सहारा हो जाये , 

हो हार निश्चित तब भी , 

एक पुरजोर कोशिश की जाय।  


दुःखों का भँवरजाल हो सामने , 

"खड़े हो ", इसी का जश्न मनाया जाये , 

सफलता - असफलता जो मिले राहों में , 

"स्वीकार कर" , आगे बढ़ा जाय।   


सफर बढ़ रहा रोज़ आगे , 

क्या फर्क पड़ता है - कौन आगे , कौन पीछे 

जहाँ भी ख़त्म हो  सफर अपना  , 

वहाँ एक " शिलालेख " गढ़ जाय।  

Friday, May 7, 2021

 

ज़िन्दगी तू गा गीत कोई नया ,

साँसो को जोड़ने का जूनून नया ,

मन में भर दे आशा का तूफ़ान ,

छेड़ उम्मीद का कोई राग नया। 

 

मुश्किलें है मगर ये कोई नहीं नया ,

जिजीविषा से अपनी पहुँचे है हम यहाँ ,

दिया है सबल मानवता ने हरदम ,

सच्चे योद्धाओ के लिए तू बिगुल बजा। 

 

उम्मीद, हौंसले और आस से ,

एक नया मधुर संगीत बना ,

हर नजर तुझ पर टिकी अब ,

साँसो से साँसो का गठजोड़ बना। 

 

जीतेगी , जीतेगी हर हाल में ज़िन्दगी ,

हर सांस को तू थामे रखना ,

छिटक रहा है अँधेरा अब ,

तू सबको आस देना , हौंसला देना।