Showing posts with label Worries. Show all posts
Showing posts with label Worries. Show all posts

Sunday, June 14, 2026

फितरत

 


हमें सुकून चाहिये ही नहीं ,

ज्यादा सुकून से हमें बेचैनी हो जाती है ,

हमारा दिमाग फड़फड़ाने लगता है ,

उसको खुराक की कमी हो जाती है ,

फिर उसे तलाश होने लगती है ,

उधेड़बुन की , तलाशने लगता है ,

वो मसले , जिनसे सुकून छीनने लगता है ,

मसला कुछ भी हो सकता है ,

व्यक्तिगत या सामाजिक ,

देश -दुनिया की या समाज की ,

वो अपनी फितरत छोड़ नहीं सकता ,

क्यूंकि ज्यादा सुकून उसको ,

हजम ही नहीं हो सकता ,

उसे दौड़ते रहना पसंद है ,

और यही दौड़ तो उसे ,

ज़िंदा रखती है अंत तक ,

जब तक साँस की आखिरी डोर ,

उसे थाम   ले। 

Saturday, March 1, 2025

प्रवाही जीवन

 

सरल , सहज और प्रवाही जीवन ,

कठिन ,उलझा और रुका हुआ मन ,

इच्छाएँ अनेक  , साधन सीमित ,

जग बौराया ,  चिंताएँ अनंत।

 

ऊबड़खाबड़ रास्ते , दौड़ अंधाधुंध ,

साँसो की नाजुक डोर पर टिका नन्हा तन ,

किस्मत और कर्मों की जोर आजमाइश ,

कुछ पल सुकून को तरसता जीवन।

 

उपाय क्या है जिससे आसान बने जीवन ,

कर्म किये जा , न कर फल की चिंता ,

भरोसा रख , उम्मीद जगा , कम कर ईच्छा ,

वक्त को इज्ज़त बख्श , हर हाल मुस्करा।

 

स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है , नसीब जगा ,

धीरे -धीरे ही सही , मंजिल की तरफ कदम बढ़ा ,

बहुत उलझनों में खुद को न उलझा ,

एक राह पकड़ बस , उसी पर चलते जा।

Monday, February 3, 2025

जीवन मूल्य

 

गुजर रहे है हम उस दौर से ,

सब कुछ धीरे -धीरे बदल रहा ,

नए मानक स्थापित हो रहे है,

पीछे बहुत कुछ छूट रहा।

 

पीछे जो छूट रहा है ,

उसमे कुछ सँभालने लायक भी है ,

मगर दौड़ इतनी भयंकर ,

सँभालने का वक्त किसको मिल रहा।

 

परिवार दरक रहा ,विश्वास हिल रहा ,

धैर्य हिचकोलों में फँसा हुआ ,

आस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह है,

ये कौन दिशा और दशा तय कर रहा।

 

प्रेम -स्वार्थ की बलि चढ़ रहा ,

अहं सिर चढ़ बोल रहा ,

बेवजह चिंताएं शरीर नाश कर रही ,

जो है हाथ में , वो भी खो रहा।

 

बेशक नए मूल्य गढ़ने चाहिये ,

परिवर्तन समय की दरकार भी है ,

मगर जिन मूल्यों पर खड़ा है जीवन , 

उनको सहेजना भी जरुरी है।