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Friday, July 17, 2026

फितरत

 

जो मिला है, उसमें चैन नहीं,

जो नहीं मिला, उसी की तलाश है।

अपने आँगन के फूलों को भूलकर,

दूसरों के बाग़ की प्यास है।

 

तुलनाओं की इस अंधी दौड़ में,

वह खुद से ही दूर होता जाता है,

ईर्ष्या की आग में जल-जलकर,

अपना ही सुकून खोता जाता है।

 

ना उसे अपने हिस्से की धूप भाती है,

ना अपने चाँद की चाँदनी,

बस दूसरों के उजालों को देखकर,

मन में भर लेता है वीरानी।

 

समझ ले वो गर एक बात ,

ज़िन्दगी हो जायेगी कितनी आसान ,

सबका अपना नसीब और कर्मों का लेखा,

गाँठ बांध ले गर वह यह ज्ञान। 

 

इंसानी फ़ितरत सच में कमाल की है,

पर सुधर जाये तो वरदान है,

अपने सुख को पहचान ले जो,

उसी का जीवन महान है।

Sunday, June 14, 2026

फितरत

 


हमें सुकून चाहिये ही नहीं ,

ज्यादा सुकून से हमें बेचैनी हो जाती है ,

हमारा दिमाग फड़फड़ाने लगता है ,

उसको खुराक की कमी हो जाती है ,

फिर उसे तलाश होने लगती है ,

उधेड़बुन की , तलाशने लगता है ,

वो मसले , जिनसे सुकून छीनने लगता है ,

मसला कुछ भी हो सकता है ,

व्यक्तिगत या सामाजिक ,

देश -दुनिया की या समाज की ,

वो अपनी फितरत छोड़ नहीं सकता ,

क्यूंकि ज्यादा सुकून उसको ,

हजम ही नहीं हो सकता ,

उसे दौड़ते रहना पसंद है ,

और यही दौड़ तो उसे ,

ज़िंदा रखती है अंत तक ,

जब तक साँस की आखिरी डोर ,

उसे थाम न  ले।