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Monday, February 3, 2025

जीवन मूल्य

 

गुजर रहे है हम उस दौर से ,

सब कुछ धीरे -धीरे बदल रहा ,

नए मानक स्थापित हो रहे है,

पीछे बहुत कुछ छूट रहा।

 

पीछे जो छूट रहा है ,

उसमे कुछ सँभालने लायक भी है ,

मगर दौड़ इतनी भयंकर ,

सँभालने का वक्त किसको मिल रहा।

 

परिवार दरक रहा ,विश्वास हिल रहा ,

धैर्य हिचकोलों में फँसा हुआ ,

आस्थाओं पर प्रश्नचिन्ह है,

ये कौन दिशा और दशा तय कर रहा।

 

प्रेम -स्वार्थ की बलि चढ़ रहा ,

अहं सिर चढ़ बोल रहा ,

बेवजह चिंताएं शरीर नाश कर रही ,

जो है हाथ में , वो भी खो रहा।

 

बेशक नए मूल्य गढ़ने चाहिये ,

परिवर्तन समय की दरकार भी है ,

मगर जिन मूल्यों पर खड़ा है जीवन , 

उनको सहेजना भी जरुरी है।

Saturday, September 21, 2024

तकनीक

 

जकड़ रही तकनीक हमें ,

दिमाग कुंद कर रही ,

मकड़जाल फ़ैल रहा ऐसा ,

हर इंसान अदृश्य कैद में जी रहा। 

 

बेशक तकनीक जीवन आसान कर रही ,

स्थापित मानव मूल्यों से समझौता कर रही ,

संवेदनायें धीरे धीरे ख़त्म कर रही ,

आभासी दुनिया,असल दुनिया को कुतर रही। 

 

शिकायत तकनीक से नहीं है ,

तकनीक पर निर्भरता से है ,

आदी बना रही शनैः -शनैः ,

वरदान से अभिशाप न बने शनैः -शनैः। 

 

इंटरनेट ने जोड़ दिया सब ,

इंटरनेट ही तोड़ रहा सब ,

नीयत का सब खेल तकनीक ,

इस युग में देव- दानव बनायेगी तकनीक।