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Friday, October 3, 2025

जीवन संसार

  

आशा और निराशा के मध्य ,

झूलता रहता है इक मन ,

होनी -अनहोनी की आशंकाएँ ,

चिंतित रहता है  मन ,

समय की मंथर गति में ,

छुपे न जाने कितने राज ,

राजा बने रंक-रंक बने महाराज ,

मन की बेचैनियाँ बहुत ,

इच्छाओं का है अम्बार ,

जिम्मेदारियाँ रीढ़ झुकाये ,

जीवन देखता बस गुबार ,

सुकून को तरसता मन ,

मस्तिष्क करे हुँकार ,

लाभ -हानि के चक्कर में ,

फँसा हुआ जीवन संसार। 

 

पार कैसे लगे ?

बहुत टेड़ा है ये सवाल ,

सबके अपने अपने लक्ष्य ,

सुकून के सबके अपने द्वार ,

समर पल रहा सबके भीतर ,

किसी की जीत , किसी की हार ,

दौड़ में  शामिल सभी,

सबका अपना अपना भाग्य ,

पल -पल जीता जो ,

परवाह नहीं -जीत हो या हार ,

स्वीकार कर हर परिणाम को ,

राग द्वेष सब दरकिनार ,

रिश्ते नातों को देता एक आकार ,

जीवन उसी का समझो - साकार। 

Wednesday, August 20, 2025

संदेश

 

मुकर्रर है वक्त हर चीज़ का ,

बेवज़ह बैचनीयाँ फिजूल है ,

कर्मों पर ही बस हक़ हमारा ,

चलते रहना जरुरी हैं। 

 

वक़्त तोलता है , परखता है 

किस्मत अपना खेल खेलती है ,

सबसे कमजोर क्षण देकर ,

उजला दरवाजा खोलती है। 

 

बिना कारण कुछ नहीं घटता ,

हर घटना का इक उद्देश्य है ,

उतार -चढ़ाव पाठ ज़िन्दगी के ,

जीवन ईश्वर का सन्देश हैं। 

 

जीवन नाजुक साँसो की डोर ,

वक्त सबका बहुत सीमित है ,

क़द्र कर वक्त की "आनन्द " ,

हर क्षण जीवन से भरपूर है। 

Friday, June 13, 2025

जीवन

 

जीवन कौन चला रहा है ? 

क्या हम ?

कतई नहीं , 

हमें तो पता भी नहीं , 

अगले पल क्या होने वाला है ? 


फिर किसके हाथ में डोर है ? 

प्रकृति की , 

नहीं , 

इसको भी कोई और नियंत्रित कर रहा है , 


फिर किसके हाथों की कठपुतली है हम ? 

कौन हमें नचा रहा है ? 

किसकी मर्ज़ी से साँसे चल रही है ?

किसकी ईच्छा से ये संसार चल रहा है ? 


सबके अपने -अपने नाम है , 

सबका अपना -अपना विश्वास है , 

कोई तो है कहीं न कही , 

जो अदृश्य होकर भी कण -कण में बसा हैं।   

Saturday, March 1, 2025

प्रवाही जीवन

 

सरल , सहज और प्रवाही जीवन ,

कठिन ,उलझा और रुका हुआ मन ,

इच्छाएँ अनेक  , साधन सीमित ,

जग बौराया ,  चिंताएँ अनंत।

 

ऊबड़खाबड़ रास्ते , दौड़ अंधाधुंध ,

साँसो की नाजुक डोर पर टिका नन्हा तन ,

किस्मत और कर्मों की जोर आजमाइश ,

कुछ पल सुकून को तरसता जीवन।

 

उपाय क्या है जिससे आसान बने जीवन ,

कर्म किये जा , न कर फल की चिंता ,

भरोसा रख , उम्मीद जगा , कम कर ईच्छा ,

वक्त को इज्ज़त बख्श , हर हाल मुस्करा।

 

स्वास्थ्य सबसे बड़ा धन है , नसीब जगा ,

धीरे -धीरे ही सही , मंजिल की तरफ कदम बढ़ा ,

बहुत उलझनों में खुद को न उलझा ,

एक राह पकड़ बस , उसी पर चलते जा।

Thursday, February 27, 2025

गंगा जी

 



 

गंगा तट पर बैठ समझ रहा जीवन सार ,

नन्ही धार बन नदिया , पहुंचे सागर द्वार ,

बहने के सफ़र में करती सबका कल्याण ,

"गंगा " से "गंगा जी " बनने का यही विस्तार। 

 

निकली छल-छल, कल-कल हिमालय से ,

करती पुनीत पावन पहुँचती हरिद्वार ,

गति मंद स्थिर बहकर कानपूर से ,

मिलती यमुना से प्रयागराज त्रिवेणी घाट। 

 

2525 किलोमीटर का सफर ,

न जाने कितने गाँव , कितने शहर ,

सदियों से बह रही है "गंगा" ,

इतिहास की इक अमूल्य धरोहर। 

 

सबको मिलाती , अपने में घुलाती ,

बह रहा अविरल प्रवाह निरंतर,

जल ही जीवन , जल ही अमृत  ,

"माँ गंगे " बहती रहो युग पर्यन्त।

Thursday, February 20, 2025

आपाधापी

 

जीवन की आपाधापी में ,

सब कुछ जैसे छूट रहा है ,

ज्यूँ - ज्यूँ आगे बढ़ना है ,

त्यूँ - त्यूँ कुछ छूट जाना है।

 

रोज़ नई मशक्कत जीवन की ,

कुछ पाना कुछ खोना है ,

अधरों में मुस्कान लिये मुसाफिर ,

रोज थोड़ा हँसना , थोड़ा रोना हैं।

 

वक्त कहाँ थोड़ा सुकून के लिये ,

ये भी करना है , वो भी भरना है ,

कस्तूरी मृग सा , मृगतृष्णा सी  ,

कभी यहाँ , कभी वहाँ भटकना है।

 

दौड़ लगी हैं बड़ी भयंकर,

सब कुछ समेट लेना है ,

भोग्य को भोग सके तक,

खुद भोग हो जाना है।

Friday, September 14, 2018

ये जीवन है


ये जीवन है ,
चढ़ाव भी आयेंगे ,
तो ढलान से भी वास्ता पड़ेगा ,
कभी फूलो पर पाँव पड़ेंगे ,
तो कभी काँटों से घाव होगा,
सूरज की किरणे साथ होंगी ,
कभी अंधेरो से मुकाबला भी होगा ,
खुशियों का अम्बार होगा ,
कभी गम भी असरदार होगा ,
जीत का स्वाद लगेगा ,
कभी हार का मुंह भी देखना पड़ेगा ,
किस्मत का साथ मिलेगा ,
कभी खाली हाथ भी रहना होगा ,
अनचाहे पलो का दीदार होगा ,
कभी चाहतों से हर द्वार सजेगा।  

चलना अपने ही बूते है यहाँ ,
साथ मिले तो ठीक , वरना अकेले ही चलना होगा
ये जीवन सफर है जनाब !
यहाँ तो हर जज्बात को साथ लेकर आगे बढ़ना ही होगा।