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Thursday, February 27, 2025

गंगा जी

 



 

गंगा तट पर बैठ समझ रहा जीवन सार ,

नन्ही धार बन नदिया , पहुंचे सागर द्वार ,

बहने के सफ़र में करती सबका कल्याण ,

"गंगा " से "गंगा जी " बनने का यही विस्तार। 

 

निकली छल-छल, कल-कल हिमालय से ,

करती पुनीत पावन पहुँचती हरिद्वार ,

गति मंद स्थिर बहकर कानपूर से ,

मिलती यमुना से प्रयागराज त्रिवेणी घाट। 

 

2525 किलोमीटर का सफर ,

न जाने कितने गाँव , कितने शहर ,

सदियों से बह रही है "गंगा" ,

इतिहास की इक अमूल्य धरोहर। 

 

सबको मिलाती , अपने में घुलाती ,

बह रहा अविरल प्रवाह निरंतर,

जल ही जीवन , जल ही अमृत  ,

"माँ गंगे " बहती रहो युग पर्यन्त।

Tuesday, January 28, 2025

महाकुंभ

 



आस्था और विश्वास का इक ज्वार है ,

कुंभ परम्पराओं  का स्वर्ग द्वार है ,

डुबकी सिर्फ मोक्ष के लिए नहीं है ,

वैतरणी पहुँचने का इक मार्ग है।

 

सकल सनातन का मूल है ,

कुंभ समागम सम्पूर्ण है ,

स्वंय के लिये इक पुण्य है ,

जगत कल्याण ही मूल्य है।

 

कुंभ आस्था का सैलाब है ,

कुंभ सनातन का सार है ,

कुंभ परम्पराओं का नाद है ,

कुंभ ही विश्वास का नाम हैं।

 

नक्षत्रों का अद्धभुत खेल है ,

संगम पर अध्यात्म का मेल है ,

दिव्य,आलौकिक त्रिवेणी संगम तट,

रज -रज पुण्य धाम है।