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Tuesday, May 5, 2026

मर्ज़ी

 

जो है , सब ईश्वर की मर्ज़ी ,

जैसा है , सब ईश्वर की मर्ज़ी ,

जो होगा ,वो ईश्वर की मर्ज़ी ,

चलते रहना ही बस मेरी मर्ज़ी।

 

ख़ुशी भी उसकी मर्ज़ी ,

दर्द भी उसकी मर्ज़ी ,

हार -जीत भी उसकी मर्ज़ी ,

चलते रहना , बस मेरी मर्ज़ी।

 

साँसे ,उसकी मर्ज़ी ,

हवायें , उसकी मर्ज़ी ,

दिन रात ,उसकी मर्ज़ी ,

बस चलते रहना , मेरी मर्ज़ी।

Tuesday, September 30, 2025

समर्पण

करके देखो एक बार ,

अर्पित खुद को राम के नाम ,

छोड़ दे  सब  चिंताएँ ,

प्रभु रखेंगे उनका ध्यान ,

चित्त लगा तू कर्मो में ,

बनेंगे सारे तेरे काम।

 

विश्वास रख उन पर ,

वो ही पार लगायेंगे ,

कर्मों के तेरे वो ही ,

फ़ूल समय पर खिलायेंगे ,

हिसाब किताब के पक्के ,

सूद समेत लौटायेंगे।


Friday, June 13, 2025

जीवन

 

जीवन कौन चला रहा है ? 

क्या हम ?

कतई नहीं , 

हमें तो पता भी नहीं , 

अगले पल क्या होने वाला है ? 


फिर किसके हाथ में डोर है ? 

प्रकृति की , 

नहीं , 

इसको भी कोई और नियंत्रित कर रहा है , 


फिर किसके हाथों की कठपुतली है हम ? 

कौन हमें नचा रहा है ? 

किसकी मर्ज़ी से साँसे चल रही है ?

किसकी ईच्छा से ये संसार चल रहा है ? 


सबके अपने -अपने नाम है , 

सबका अपना -अपना विश्वास है , 

कोई तो है कहीं न कही , 

जो अदृश्य होकर भी कण -कण में बसा हैं।   

Tuesday, November 7, 2023

जीवन नैय्या

 


 जितना आपको जानना चाहता हूँ ,

उतना गहरा आपको पाता हूँ ,

मैं जड़बुद्धि , हे ! परमेश्वर ,

तेरी ओट में रहना चाहता हूँ। 

 

तेरे प्रकाश पुँज से उत्पन्न ,

तुझमें ही इक दिन विलीन होना है ,

तेरी रहमतों से ही ईश्वर,

जीवन पथ मेरा चलना हैं। 

 

न कोई शिकायत मेरी ,

न कोई शिकवा है ,

जो खोया -पाया नसीब मेरा ,

तेरी तो बस रहमत हैं।  

 

सुःख -दुःख के पलड़े ,

जीवन पथ चलते रहते है,

तुझ पर अटूट विश्वास से ,

दिन मेरे कटते रहते है।

 

सौंप देता हूँ रोज़ अपनी नैया ,

तू ही बस मेरा खैवय्या है ,

चिंता फिर किस बात की मुझे ,

जीवन सागर पार उतरना है। 


Tuesday, October 10, 2023

विश्वास

 

मैं सूक्ष्तम रूप तेरे जगत का ,

तुम गोचर -अगोचर जगत के ,

तुम ब्रह्माण्ड के कण -कण बसे,

मैं धूल का इक कण जैसे। 

 

मैं भेड़ सा चरता तेरे उपवन में ,

तुम चरवाहे मेरे ,मर्जी हाँके ,

तेरी ओट में रहता हरदम ,

तेरी मर्ज़ी - सुःख -दुःख कटे। 

 

जो समय दिया,जितना दिया तूने ,

नियति बाँधी है मेरे गले ,

न कोई गिला,न कोई शिकवा ,

मेरे हिस्से ही कर्मफल मेरे। 

 

बस इतनी सी विनती प्रभु ,

जो भी आये मेरे हिस्से ,

शीश नवा शिरोधार्य करुँ ,

विश्वास तुझपर कभी न टूटे। 

 

Tuesday, March 26, 2019

" मैं "




मेरी साँस तुझसे ,
रहमते तुझसे ,
कण कण तुझसे ,
तेरी दी हुई ज़िन्दगी पर ,
फिर "मैं " कैसे ?

तू हँसाये ,
तू रुलाये ,
गिरु गर कभी तो ,
तू सँभाले ,
फिर " मैं " कहाँ टिके ?

तू आधार ,
तू निराकार ,
तू जगतव्यापि ,
तुझसे सारा संसार ,
फिर "मैं " का भ्रम कैसे ?

जब कभी " मैं " छाता है ,
मुझे तेरा ख्याल आता है ,
हे ! जग के स्वामी ,
“अहं” मेरा काफूर हो जाता है। 

Image Source - Google 

Thursday, November 15, 2018

वो तुम्हारे साथ है।


जब सारे रास्ते बंद दिखे , 
उम्मीद की हर किरण धुले , 
जीवन एक बोझ सा लगे , 
तब एक हलकी सी दस्तक सीने में , 
आशा बनकर उभरे , 
तब समझ जाओ , 
वो तुम्हारे साथ है।  

जब हिम्मत टूटने लगे , 
हौंसला साथ छोड़ने लगे , 
सब कुछ बड़ा बेमानी सा लगने लगे , 
अचानक एक आँसू गिरकर , 
चमकने लगे , 
दिल थोड़ा सा हल्का लगने लगे , 
तब समझ जाओ , 
वो तुम्हारे साथ है।  

घुप्प अँधेरा हो , 
कहीं कुछ दिखाई न दे , 
सब अमावस की काली रात लगे , 
तब कही दूर एक टिमटिमाता जुगनू भी दिखे , 
तब समझ जाओ , 
वो तुम्हारे साथ है।  

जब सब साथ छोड़ दे , 
अकेला ये जहाँ लगने लगे , 
सारे रिश्ते नाते दूर के लगने लगे , 
तब आपको माँ का चेहरा  दिखे , 
तब समझ जाओ , 
वो तुम्हारे साथ है।

जब खुद के वजूद पर संदेह हो जाये ,
अपने होने का अर्थ समझ न आये ,
सबसे बुरा ख्याल मन में आये  ,
तब आपको किसी लाचार और मजबूर का चेहरा याद आये ,
तब समझ जाओ , वो ज़िन्दगी का दाता
आपके साथ है।    

Image source - google

Friday, October 5, 2018

नमन


सूक्ष्म से विशाल तक ,
न्यून से अथाह तक ,
पातल  से अंतरिक्ष तक ,
मुझ से हम तक , 
आकार से निराकार तक 
सर्वव्याप्त , सर्वत्र, स्वच्छंद
तेरा कैसे गुणगान करू ,
कैसे तेरा एहतेराम करू ,
इक इक साँस में समाया, 
कैसे तेरा धन्यवाद करूँ।  
रोम रोम में तेरी कृपा , 
भ्रम में जीता हूँ कि ,
अपने बलबूते जिंदगी जीता हूँ ,
कठपुतली तेरे हाथ की , 
जैसे तू नचाता , नाचता हूँ।  

जीवन के इस रंगमंच पर , 
किरदार तू हमसे निभवा रहा , 
श्रेष्ठ निर्देशक बन ,
नित नए दृश्य गढ़ रहा , 
आदि और अंत तू ही जानता है , 
हम तो निमित किरदार है तेरे नाटक के , 
जीवन हर पल तू रच रहा।  

जीवन तेरी थाती है, 
तेरा ही अधिकार है ,
क्या अतिकार और क्या प्रतिकार , 
तेरे इशारो पर नाच रहा ये सारा संसार , 
मैं मनुज तुच्छ सा , 
झूठा मेरा अहंकार , 
"मैं " के वहम को , 
तू पल में कर सकता है संहार ,
नियति तेरे हाथो में , 
कर्मो पर बस मेरा अधिकार ,
नतमस्तक हूँ , शीश झुकाता हूँ ,
हतप्रभ हूँ देखकर ,
हर पल तेरे नए चमत्कार।  

तुझ पर आस है , 
तू ही विश्वास है , 
जीवन नैया का , 
तू ही खेवनहार है ,
किरदार जो तूने दिया ,
सब उसे निभा रहे , 
जीवन के इस रंगमंच में ,
तमाशे रोज़ तेरे इशारे पर हो रहे , 
जीवन तुझसे , तुझपर ही ख़त्म ,
"सत्य" एक तू , बाकि सब भ्रम ,
तेरी बनायीं "माया " में सब उलझ रहे ,
रोज़ ज़िन्दगी के नए मायने गढ़ रहे ,
हुकूमत तेरी , सत्ता तेरी 
बिना तेरी मर्ज़ी पत्ता तक न हिले।

शीश झुका , मन में स्मरण 
हे ! जगत के स्वामी 
तुझे कोटि कोटि नमन ,
भटके कभी कर्मपथ पर अगर ,
राह फिर सही दिखाना भगवन।  

Wednesday, March 7, 2018

प्रार्थना



हे ! रचनाकार जगत के ,
नमन और अभिनन्दन , 
चराचर जगत के स्वामी , 
हाथ जोड़कर सादर वंदन।  

लोभ , माया , क्रोध , अहंकार से ,
चहुओर हो रहा क्रंदन ,
करने कब आओगे इसका हरण , 
कैसे मौन हो ? हे ! रघुनन्दन।  

ज्ञान पर अज्ञान भारी , 
शुभ नहीं है ये लक्षण , 
सिसक रही है जगत जननी , 
हो रहा रोज चीरहरण।  

सेवक भक्षक बन गए , 
भूल गए सब ईमान धर्म ,
झूठ की जय जयकार हो रही , 
सत्य तोड़ रहा है दम।  

तन्द्रा तोड़ो , सेज छोड़ो 
अवतरित हो अब भगवन ,
मूल्यों की स्थापना के लिए , 
छेडो फिर एक " महाभारत " का रण।