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Monday, August 3, 2020

लक्ष्य

लक्ष्य कैसा हो ?

समयबद्ध ,

नियमबद्ध ,

अनुशासनबद्ध ,

विशिष्ट ,

प्रेरक ,

और मंगलमय हो। 

 

लक्ष्य साधन से पहले ,

योजना ,

साधना ,

समर्पण ,

कर्मतप,

एकाग्रता

और

एकनिष्ठता हो। 

 

लक्ष्य साध्य कैसे हो ?

घुमते चक्र में बँधी मछली ,(साधना )

नीचे पानी में छाया देख, ( एकाग्रता )

धनुष की प्रत्यंचा चढ़ा , (विश्वास)

एक तीर से , (कर्मतप )

चक्षु भेदन जैसा हो। ( एकनिष्ठता )


Tuesday, March 26, 2019

" मैं "




मेरी साँस तुझसे ,
रहमते तुझसे ,
कण कण तुझसे ,
तेरी दी हुई ज़िन्दगी पर ,
फिर "मैं " कैसे ?

तू हँसाये ,
तू रुलाये ,
गिरु गर कभी तो ,
तू सँभाले ,
फिर " मैं " कहाँ टिके ?

तू आधार ,
तू निराकार ,
तू जगतव्यापि ,
तुझसे सारा संसार ,
फिर "मैं " का भ्रम कैसे ?

जब कभी " मैं " छाता है ,
मुझे तेरा ख्याल आता है ,
हे ! जग के स्वामी ,
“अहं” मेरा काफूर हो जाता है। 

Image Source - Google 

Tuesday, September 11, 2018

कुव्वत





नादान है वो जो तुम्हे हारा हुआ समझते है ,
उन्हें तुम्हारी कुव्वत का शायद एहसास नहीं है ,
"हीरा" हो तुम ,
जिसे समय का कोयला तपा रहा है। 

ढाल रही है कायनात भी खुद को ,
तेरी मेहनत और हिम्मत का इल्म उसे भी है ,  
बदल रही है वो भी परिस्थितियां ,
उसको भी बेसब्री से तेरी कामयाबी का इन्तजार है। 

इल्तजा है बस इतनी सी ,
हौंसले और विश्वास को डिगने मत देना ,
आये कितने ही तूफ़ान ,
खुद पर और खुदाई पर यकीन रखना।  

"तपा " रहा है जो समय तुझे ,
एक दिन वही यशगान का साक्षी बनेगा ,
"चमक " तेरी बिखरेगी चहुँओर ,
तू "हीरे " सी चमक बिखेरेगा।