Showing posts with label Life. Show all posts
Showing posts with label Life. Show all posts

Friday, January 16, 2026

ज़िन्दगी का पंचनामा

 

शब्दों में "शोर " हो चला हूँ ,

शहरों में "दिल्ली " हो चला हूँ ,

माँग रही है हिसाब किताब ज़िन्दगी ,

"उम्मीद" का लॉलीपॉप थमा रहा हूँ।

 

देहरी छोड़ी, घर छोड़ा, गाँव छोड़ा,

दोस्त छोड़े , परिवार छोड़ा ,

कुछ बड़ा करने के चक्कर में ,

"शहरों " में धक्के खा रहा हूँ।

 

जीविका के लिये " नौकरी " में हूँ ,

जी -हुजूरी से उकता गया हूँ ,

ज़िन्दगी कट रही है नौ से छः के फेर में ,

रविवार को ही जैसे हफ्ता जी रहा हूँ।

 

"धोखे " की इक ज़िन्दगी गुजर रही है ,

सुलझने की बजाय और उलझ रही है ,

भ्रम है फुर्सत मिलेगी आगे चलकर,

उम्र धीरे धीरे उम्रदराज हो रही है।

Monday, September 8, 2025

सुनो ज़िन्दगी

सुनो ज़िन्दगी , 

एक बात करनी है , 

इक मुद्दा सुलझाना है , 

मुद्दा ये है , 

जिस गति से तुम भाग रही हो , 

वह गति मुझे मंजूर नहीं है , 

तुम्हारा क्या है ? 

समय के साथ क्यों दौड़ लगा रही हो , 

थोड़ा आराम आराम से चलो , 

मेरी ख्वाइशें हर मील के पत्थर पर , 

अभी भी अधूरी है ,

और याद रखना , 

तुम भी फिर अधूरी ही रह जाओगी, 

कम से कम एक ज़िन्दगी में।    

Thursday, August 28, 2025

सफ़र के नुक्ते

 

कब , कहाँ , किसको , किसकी पड़ी है ,

तन कहीं , मन कहीं, दिमाग की बत्ती बुझी पड़ी है ,

कहने को अकेले का ही सफर है "आनन्द"  यहाँ ,

नन्ही सी गाड़ी में न जाने कितने सवारियों की जिम्मेदारी है।

 

जिम्मेदारी तक तो ठीक ,

उम्मीदों का बोझ भारी है ,

मन गिरवी चंद पैसों खातिर ,

दिमाग में ख्याली पुलाव है ,

तन तरसता थोड़ा सुस्ताने को ,

पिछड़ने का डर लाज़मी है ,

अपने दुःख तो सहे जाते है ,

दूसरों के सुःख का दुःख ज्यादा हावी हैं।

 

जरूरतें तो कम ही है ,

इच्छाओं का ही कोई अंत नहीं है ,

जब तक अप्राप्य है , तभी तक धुन है ,

मिल गया तो फिर वह तुच्छ समान है ,

स्वर्ग की तलाश में भटक रहे सब ,

हर कोई परेशान और खुद हैरान है , 

संतोष किस चिड़िया का नाम है " आनन्द ",

भागते रहना ही तो जिंदगी का दूसरा नाम हैं।

Wednesday, August 20, 2025

संदेश

 

मुकर्रर है वक्त हर चीज़ का ,

बेवज़ह बैचनीयाँ फिजूल है ,

कर्मों पर ही बस हक़ हमारा ,

चलते रहना जरुरी हैं। 

 

वक़्त तोलता है , परखता है 

किस्मत अपना खेल खेलती है ,

सबसे कमजोर क्षण देकर ,

उजला दरवाजा खोलती है। 

 

बिना कारण कुछ नहीं घटता ,

हर घटना का इक उद्देश्य है ,

उतार -चढ़ाव पाठ ज़िन्दगी के ,

जीवन ईश्वर का सन्देश हैं। 

 

जीवन नाजुक साँसो की डोर ,

वक्त सबका बहुत सीमित है ,

क़द्र कर वक्त की "आनन्द " ,

हर क्षण जीवन से भरपूर है। 

Friday, July 11, 2025

महत्व

 

रात ने कभी सुबह से शिकायत नहीं की ,

सुबह ने रात को कभी नहीं चिढ़ाया ,

दोनों को पता है महत्व इक दूजे का ,

इक दूसरे के बिना अस्तित्व कहाँ उनका। 

 

उतार -चढ़ाव भी तो ऐसे ही जीवन चक्र में ,

एहसासों के अनुभव से गुजरने का सफर सारा ,

मुक्कमल सफ़र -ऐ -ज़िन्दगी तो वही जहाँ में ,

कर्मफल जो मिला , जिसने दिल से स्वीकारा। 

Friday, June 13, 2025

इन्तजार

तुम मिलोगे दुबारा ? 

मैं नहीं जानता , 

मगर उम्मीद है , 

ज़िन्दगी के किसी न किसी , 

मोड़ पर , 

हम फिर टकरायेंगे , 

वो बात अलग होगी , 

तुम भी न जाने कितना सफर,

तय कर आये होगे, 

और मैं भी , 

मगर विश्वास तब तक , 

कायम रहेगा फिर मिलने का , 

जब तक ये दुनिया गोल रहेगी।  

Friday, April 18, 2025

क्षमता

 


हम , अधिकतर , 

अपनी क्षमताओं को कमतर आँकते है , 

और जो , अपनी क्षमताओं से ऊपर बढ़कर , 

कार्य कर जाते है , 

वही इतिहास बना जाते है, 


दुर्भाग्य से , अधिकतर , 

किसी भी कारणवश , 

अपनी क्षमताओं का प्रयोग , 

किये बिना ही , 

समस्त जीवन गुजार देते है।  

Thursday, February 20, 2025

आपाधापी

 

जीवन की आपाधापी में ,

सब कुछ जैसे छूट रहा है ,

ज्यूँ - ज्यूँ आगे बढ़ना है ,

त्यूँ - त्यूँ कुछ छूट जाना है।

 

रोज़ नई मशक्कत जीवन की ,

कुछ पाना कुछ खोना है ,

अधरों में मुस्कान लिये मुसाफिर ,

रोज थोड़ा हँसना , थोड़ा रोना हैं।

 

वक्त कहाँ थोड़ा सुकून के लिये ,

ये भी करना है , वो भी भरना है ,

कस्तूरी मृग सा , मृगतृष्णा सी  ,

कभी यहाँ , कभी वहाँ भटकना है।

 

दौड़ लगी हैं बड़ी भयंकर,

सब कुछ समेट लेना है ,

भोग्य को भोग सके तक,

खुद भोग हो जाना है।

Friday, January 11, 2019

अभिलाषा



जब सांझ आये जीवन की भगवन , 
बस इतनी कृपा हो , 
फक्र कर सकूं , सीना चौड़ा 
जीवन पर अपने गर्व हो।  

याद करूँ अपने जीवन पथ को , 
गर्व की अनुभूति हो , 
कर्मो के मेरे जीवन पथ  पर , 
कही कोई सिसकी न हो।  

याद करे अगर लोग तो , 
उनकी मधुर स्मृतियो में हो , 
ठेस पहुँचायी हो गर किसी को , 
वो भी भुलाने लायक हो।  

बंद मुट्ठी बाँधे जन्मा था , 
खाली हाथ ही जाना है , 
जीवनपथ का पथिक निरंतर , 
तुझ पर कभी संशय न हो।  

क्या हारा , क्या जीता 
क्या खोया , क्या पाया 
जीवन इससे उन्मुक्त , 
अपने जीवन पथ पर गर्व हो।

जीवन की उस साँझ में ,
शांति  और सुकून हो , 
जीवन जो दिया तूने , 
"भरपूर जीये"- तसल्ली हो। 

छायाचित्र आभार - गूगल 

Friday, October 12, 2018

कश्मकश


गुजर रही थी ज़िन्दगी सुकून से, 
ख्वाईशो ने लफड़े कर दिए , 
उम्र गुजरती रही , 
और ये बढ़ते रहे।  

न मिला फिर चैन-ओ -सुकून ,
बस भागते रहे , 
इस भागमभाग में , 
दिन बीतते रहे।  

दिल ने कई बार टोका , 
दिमाग ने हामी न भरी , 
दोनों की कश्मकश में , 
हम पीसते रह गए।  

कुछ अदद जरूरते ही तो थी हमारी , 
उनसे ऊपर ऐशो आराम जुटाने में लग गए ,
लगी ऐसी लत की , 
ऐश और आराम दोनों भूल गए।  

ज़िन्दगी गाहे बगाहे चेताती रही ,
हम अनुसना कर आगे बढ़ते रहे , 
अच्छे "कल " के इन्तजार में , 
हम "आज " को खोते रहे।  

सुकून की तलाश में शुरू किया था जो सफर , 
तनाव में हर वक्त रहने लगे , 
एक किनारे से चले थे हम , 
दूसरे किनारे पर न जाने कैसे पहुँच गए।  

Friday, September 14, 2018

ये जीवन है


ये जीवन है ,
चढ़ाव भी आयेंगे ,
तो ढलान से भी वास्ता पड़ेगा ,
कभी फूलो पर पाँव पड़ेंगे ,
तो कभी काँटों से घाव होगा,
सूरज की किरणे साथ होंगी ,
कभी अंधेरो से मुकाबला भी होगा ,
खुशियों का अम्बार होगा ,
कभी गम भी असरदार होगा ,
जीत का स्वाद लगेगा ,
कभी हार का मुंह भी देखना पड़ेगा ,
किस्मत का साथ मिलेगा ,
कभी खाली हाथ भी रहना होगा ,
अनचाहे पलो का दीदार होगा ,
कभी चाहतों से हर द्वार सजेगा।  

चलना अपने ही बूते है यहाँ ,
साथ मिले तो ठीक , वरना अकेले ही चलना होगा
ये जीवन सफर है जनाब !
यहाँ तो हर जज्बात को साथ लेकर आगे बढ़ना ही होगा।   



Thursday, June 14, 2018

ज़िन्दगी क्या है ?


ज़िन्दगी क्या है ?
हसरतो के समंदर में , 
उम्मीदों के गोते है , 
कभी हाथो में मोती , 
कभी खाली हाथ भी लौटे है।  

ज़िन्दगी क्या है ?
सपनो के आसमान में , 
हौंसलो के पंख है , 
कभी क्षितिज के उस पार तक जाने की ललक , 
कभी थोड़ा पँख फड़फड़ाने से थकान है।  

ज़िन्दगी क्या है ? 
अपेक्षाओं के धरातल  में , 
रिश्तो का जाल है , 
कभी खरे उतरते , 
कभी दुःख का जंजाल है।  

ज़िन्दगी क्या है ?
भावनाओ के पहाड़ में , 
आत्मबल का साथ है,
कभी गिरे , कभी चढ़े 
चलते रहने का नाम है।  

ज़िन्दगी क्या है ?
ईश्वर की रहमतो में , 
एक नायाब वरदान है ,
कभी बोझ , कभी फूलो सी सेज ,
सबकी अपनी अपनी पहचान है।  

Monday, May 21, 2018

चिर विश्राम

बहुत दूर तक जाना चाहता हूँ ,
जब तक थक कर चूर न होऊं ,
तब तक चलना चाहता हूँ ,
तुझमे मिलने से पहले ,
मैं जीना चाहता हूँ। 

जीवन रस से भरा हुआ है ,
हर रस का स्वाद चखना चाहता हूँ ,
जीत -मिले या हार ,
हर अनुभव लेना चाहता हूँ। 

कितने रंग बिखरे पड़े है ,
हर रंग का मतलब अलग अलग,
मैं उन रंगो से ,
अपना एक इंद्रधनुष बनाना चाहता हूँ। 

अनंत आकाश , धरती विशाल
जानता हूँ पग  छोटे मेरे  ,
फिर भी जिद्द है मेरी ,
अपना एक संसार बनाना चाहता हूँ। 

सुख - दुःख आएंगे कितने ही ,
उनको हँस कर पार करूँगा  ,
चिर निद्रा में जाने से पहले ,
जीवन को एक नया अर्थ देना चाहता हूँ। 

मेरा प्रारब्ध तेरे हाथो में ,
हर जगह साये की तरह मेरे साथ तू ,
ये जीवन तेरी थाती है ,
तुझमे मिलने से पहले -अपने पदचिन्ह उकेरना चाहता हूँ। 

जानता हूँ किराये का ये जहाँ ,
मेहमान बनकर आया हूँ ,
क्या लाया -क्या पाया के दलदल से उभरने से पहले ,
जीवन के हर क्षण को जीना चाहता हूँ। 

कमियाँ बहुत है मुझमे ,
हर पल सीख है जीवन में ,
अपनी जय -पराजय का मैं खुद ,
साक्षी बनना चाहता हूँ। 

चिर -विश्राम से पहले ,
खुद को जीवन समर में ,
तन -मन और कर्म से ,
पूर्णत :झोंकना चाहता हूँ। 

तेरी कृति हूँ मैं ,
तुझमे ही समाना है ,
जीवन सत्य अटल , अडिग है ,
कुछ उपमान मैं  भी गढ़ना चाहता हूँ। 

इतना ज्ञान बिखरा पड़ा है ,
एक जीवन में समेट पाऊँ ,
संभव नहीं है ,
बस किसी किताब का एक पन्ना बनना चाहता हूँ। 

राग , द्वेष , क्रोध , मद, लालच , घमंड 
फैला रहा है अपनी जड़े
इन सबसे विरक्ति का ,
कोई मार्ग खोजना चाहता हूँ। 

रिश्ते - नाते मतलब खो रहे ,
स्वार्थ के पनपते बीजो के बीच,
किसी असहाय और निर्बल की ,
एक आस की किरण बनना चाहता हूँ। 

मानवता का  नित रोज़ पतन ,
उसूलो का बलिदान ,
मूल्यों की रक्षा के खातिर ,
शंखनाद करना चाहता हूँ। 

जानता हूँ मिटटी से बना मैं ,
मिट्टी में ही मिल जाऊँगा ,
किस बात का घमंड करूँ ,
कोई फूल उग सके, वो मिट्टी बनना चाहता हूँ। 

चिर विश्राम में जाने से पहले ,
धरती में आने के,
अपने प्रयोजन को ,
इति -सिद्धम करना चाहता हूँ।  

Friday, May 18, 2018

कारवाँ जारी है



जीवन अपनी गति से बढ़ रहा , 
कोई आगे - कोई पीछे चल  रहा ,
किसी के माथे पर थकन की शिकन , 
कोई मदमस्त गीत गुनगुना रहा , 
देखो !जीवन कारवाँ गुजर रहा।  

किसी को क्षितिज के उस पार की चिंता , 
कोई गुबार में उलझ रहा , 
किसी को सहारे की जरुरत , 
कोई अकेला ही चल रहा ,
देखो ! जीवन कारवाँ गुजर रहा।  

कही जेठ की धूप झुलसा रही , 
कहीं चाँद अपना अमृत बरसा रहा , 
बनते - बिगड़ते रिश्तो के बीच , 
प्रेम अपनी राह खुद बना रहा , 
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

सब उम्मीदों को सहारा बनाकर , 
यादों की गठरी उठाकर , 
अपने सफर को यादगार बनाने की कशमकश में ,
चला जा रहा,
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

किसी की ख्वाहिशें पनप रही , 
किसी को सफर लम्बा लग रहा , 
जो अँधेरे में भी साहस न छोड़े , 
उसका सफर आरामदायक कट रहा ,
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

राहों में कही फूल बिखरे पड़े , 
कही काटों से भी पाला पड़ रहा , 
संतुलित होकर जो चल रहा , 
इस कारवाँ का आनंद वही ले रहा , 
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

चलना अकेले ही है , कुछ साथ आ गए तो अच्छा है , 
कहकहे लगाते आगे बढ़ते रहिये ,
सुख -दुःख बाँटते हुए चलते रहिये, 
आपके पदचिन्हो पर वो देखो, 
कोई चल कर अब आगे बढ़ रहा , 
देखो ! जीवन कारवाँ चल रहा।  

Wednesday, October 11, 2017

ज़िन्दगी

हर किसी के लिए ज़िन्दगी के मायने अलग ,
किसी के लिए चक्रव्यूह ,
किसी के लिए मृगतृष्णा ,
किसी के लिए काँटो का ताज ,
किसी के लिए फूलो की सेज ,
किसी के लिए संघर्ष गाथा ,
किसी के लिए भाग्य का खेल,
किसी के लिए अंतहीन दौड़ ,
किसी के लिए मोक्ष ,
किसी के लिए प्यार -मोहब्बत ,
किसी के लिए रंजिश का सफर ,
हर किसी के लिए ज़िन्दगी के मायने अलग।

गरीब के लिए दो वक्त की रोटी ,
अमीर के लिए ऐशो आराम का जीवन ,
प्रेमी के लिए प्रेयसी ,
प्रेयसी के लिए प्रेमी जीवन ,
रोगी के लिए स्वास्थ्य ,
निरोगी के लिए भरपेट भोजन ,
माँ के लिए उसके बच्चे जीवन ,
पिता  के लिए बच्चो का भविष्य जीवन ,
दोस्तों के लिए दोस्ती ,
दुश्मनो के लिए दुश्मनी ,
हर किसी के लिए ज़िन्दगी के मायने अलग,
ऐ ! ज़िन्दगी तेरे इतने रूपों को नमन। 

कलाकार के लिए रंगमंच ,
खिलाडी के लिए खेल ,
कवि के लिए कविता ,
लेखक के लिए कहानी ,
नेता के लिए कुर्सी ,
किसान के लिए फसल ,
छात्रों के लिए पढाई ,
बच्चो के लिए मौज मस्ती
नौकरीपेशा के लिए सैलरी ,
बेरोजगारो के लिए नौकरी ,
सैनिको के लिए देशभक्ति ,
एक ज़िन्दगी , कितने रंग ,
शायद इसलिए कहते है रंगीन ज़िन्दगी। 

कोई इसे क्षणभंगुर कहता ,
कोई ठोस धरातल ,
कोई नदी की संज्ञा देता ,
कोई कहता मरुस्थल। 
कोई कहता खूबसूरत ,
कोई कहता दलदल ,
कोई कहता आज़ादी ,
कोई कहता सफर।    
किसी के लिए जिम्मेदारियां ,
कोई अपने में ही मस्त मगन ,
ज़िन्दगी एक , रूप अनेक ,
ज़िन्दगी देने वाले तुझे शत शत नमन। 

मेरी नजर में बहती नदी है ज़िन्दगी ,
कही से शुरू होकर ,
कही दूर सागर में मिलना है ज़िन्दगी ,
इस सफर में कही चंचलता ,
कही ठहराव ,
कही तेज बहाव ,
कही गहराई ,
कही कंकड़ पत्थरो  में लुढ़कती ज़िन्दगी ,
कही पूजा योग्य ,
कही तिरस्कृत ,
कही उफान ,
कही शांतचित ,
लेकर अपने साथ कितने अनुभव ,
कुछ खट्टे , कुछ मीठे ,
सागर में मिलने से पहले ,

अविरल बहाव ही शायद है ज़िन्दगी।  

Tuesday, August 1, 2017

रेत की घडी




हसरतो का हौंसला तो देखो ,
एक पूरी तो दूसरी तैयार रहती हैं।  
भागते भागते इनके पीछे , 
पूरी ज़िन्दगी बीत जाती हैं।  

शायद यही ज़िन्दगी को गति देती हैं , 
कदमो को रुकने नहीं देती हैं।  
धीरे धीरे रेत की घडी की मानिंद , 
ज़िन्दगी हाथ से फिसलती जाती हैं।