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Thursday, September 25, 2025

प्रकृति का गुरुमंत्र


मसला सिर्फ इक हल न हुआ ,

जितनी मेहनत की , उतना फल न मिला ,

देखे बियाबान में बहुतेरे ऐसे ,

किस्मत से जिनको भर -भरके मिला। 

 

सोचा षड़यंत्र है ये कोई प्रकृति का ,

थोड़ा दिमाग लगाया तो समझ आया ,

जिन्होंने मेहनत की सही दिशा में ,

समय और किस्मत का उनको साथ मिला।

 

मेहनत तो सभी करते है अपने स्तर पर ,

फर्क फिर कहाँ पैदा होता है , ये बता ,

सही समय पर सही दिशा में जो ऊर्जा लगाये ,

प्रकृति के उसूलों से मिलती है उसी को सफ़लता। 


Monday, August 25, 2025

सापेक्षिक पंक्तियाँ

 

विकल्प हमेशा से मौजूद है ,

"भाग लो" या "भाग" लो। १। 

 

राय अपनी तभी दो ,

अगला जब मानने को तैयार हो।२।

 

मेहनत करो , खूब करो ,

मगर दीवार खिसकाने में मत करो।३।    

 

ऊंगलीबाजी हर जगह ठीक नहीं ,

अपना गिरहेबां पहले ठीक करो।४।  

 

उम्मीद जायज है किसी से ,

मगर उसके भरोसे ही मत रहो।५। 

 

रिश्ते दो तरफा ही चलते है ,

अकेले हाथ से चुटकी बजाया करो।६।  

 

मेहनत का उम्र से सीधा रिश्ता है ,

जितनी जल्दी कर लो , अच्छा हैं।७। 

 

नेताओं के आपसी रिश्ते "गुप्त " होते है ,

बहकावे में आकर अपने रिश्ते ख़राब न करो।८। 

 

जो दिख रहा है , वही सच नहीं है ,

सोशल मीडिया के दौर में बड़ा झोल है। ९।

 

जेब में धन है , तब तक पूछे यार -रिश्तेदार ,

जेब खाली , पल्ला झाड़े - धन से चल रहा संसार।१०।  

 

वक्त बदल रहा तेजी से , ताल कैसे कोई मिलाये ,

पिछड़ने का खतरा बड़ा , बस सीखते जाइये। ११।

 

 है "ज्ञान" तो जो माँगे उसको दो ,

हर जगह "ज्ञानी " बनने से बचो। १२।  

Wednesday, August 20, 2025

संदेश

 

मुकर्रर है वक्त हर चीज़ का ,

बेवज़ह बैचनीयाँ फिजूल है ,

कर्मों पर ही बस हक़ हमारा ,

चलते रहना जरुरी हैं। 

 

वक़्त तोलता है , परखता है 

किस्मत अपना खेल खेलती है ,

सबसे कमजोर क्षण देकर ,

उजला दरवाजा खोलती है। 

 

बिना कारण कुछ नहीं घटता ,

हर घटना का इक उद्देश्य है ,

उतार -चढ़ाव पाठ ज़िन्दगी के ,

जीवन ईश्वर का सन्देश हैं। 

 

जीवन नाजुक साँसो की डोर ,

वक्त सबका बहुत सीमित है ,

क़द्र कर वक्त की "आनन्द " ,

हर क्षण जीवन से भरपूर है। 

Saturday, May 3, 2025

अक्सर

 अक्सर , 

हम सोचते कुछ है , 

होता कुछ है , 


अक्सर , 

हम चाहते कुछ है , 

मिलता कुछ है , 


अक्सर , 

हम बनना कुछ चाहते है , 

बन और कुछ जाते है , 


अक्सर , 

हम करना कुछ चाहते है , 

कर और कुछ रहे होते है , 


बस इसी अंतर को , 

बड़े -बुजुर्ग और ज्ञानी , 

नियति, नीयत और कर्मो का हेर-फेर कहते है।  

Monday, January 10, 2022

वक्त

 


फितरत है वक्त की,बदलते रहने की,

जो भी है , जैसा भी है - बदल जायेगा ,

कर्मों की धूणी हैं और किस्मत की झोली ,

धैर्य रख , इक दिन सबका आयेगा। 

 

ठहरता कहाँ है किसी एक के पास ,

इसके तराजू में हरेक तोला जायेगा ,

मुलाकात तय है कर्मों और किस्मत की ,

हिम्मत रख , तेरे हिस्से का तुझे मिल जायेगा।