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Wednesday, April 22, 2026

सब्र का फल

 

रात कितनी काली क्यों हो,

एक जुगनू भ्रम तोड़ देता है,

उदासी कितनी भले ही हो,

एक ख़ुशी का पल सब भुला देता है।

 

लहरें कितनी तेज क्यों हो,

एक पत्थर उसे रोक ही देता है,

तूफानों को अक्सर एक,

नन्हा पौधा हँसकर सह लेता है।

 

हार तो बस एक सबक है,

जीतने की तैयारी का एक कदम है,

मेहनत एक दिन रंग लायेगी ही,

सब्र का फल मीठा होता है।

 

जूनून कुछ पाने का सच्चा है,

कायनात भी साथ देती है ,

विश्वास हो खुद पर तो,

सफलता तुम्हारे क़दमों में होती है

Thursday, September 25, 2025

प्रकृति का गुरुमंत्र


मसला सिर्फ इक हल न हुआ ,

जितनी मेहनत की , उतना फल न मिला ,

देखे बियाबान में बहुतेरे ऐसे ,

किस्मत से जिनको भर -भरके मिला। 

 

सोचा षड़यंत्र है ये कोई प्रकृति का ,

थोड़ा दिमाग लगाया तो समझ आया ,

जिन्होंने मेहनत की सही दिशा में ,

समय और किस्मत का उनको साथ मिला।

 

मेहनत तो सभी करते है अपने स्तर पर ,

फर्क फिर कहाँ पैदा होता है , ये बता ,

सही समय पर सही दिशा में जो ऊर्जा लगाये ,

प्रकृति के उसूलों से मिलती है उसी को सफ़लता। 


Saturday, September 20, 2025

सफलता की कुँजी

 

इक जूनून सा जगाना पड़ता है ,

ध्यान बगुले सा लगाना पड़ता है ,

आसानी से नहीं मिलती मंजिल ,

बाकियों से अधिक श्रम करना पड़ता है। 

 

विश्वास खुद पर रखना होता है ,

निराशाओं को पार करना होता है ,

हुनर तो बहुतों के पास हैं "आनन्द " ,

एक कदम औरों से आगे चलना होता है। 

 

शंका स्वंय पर कमजोरी है ,

इंसान के बूते सब कुछ हासिल है ,

करना पड़ता है त्याग थोड़ा ,

मखमल में कहाँ कमल खिलता हैं। 

 

ध्यान और मेहनत सफलता की कुँजी है ,

परिस्थितियाँ तो बस इक बहाना है ,

लक्ष्य सामने , परिश्रम एकसार ,

गर्जन में ही कदम्ब के फूल खिलते है। 

Thursday, December 8, 2022

प्रयास

 उम्मीद तब तक मत छोड़ो , 

जब तक अंतिम प्रयास न हो जाये, 

और अंतिम प्रयास ऐसा करो , 

वो प्रयास का पर्याय हो जाय। 


फँसे हो कभी घुप्प अंधेरों में , 

कोई जुगनू ही सहारा हो जाये , 

हो हार निश्चित तब भी , 

एक पुरजोर कोशिश की जाय।  


दुःखों का भँवरजाल हो सामने , 

"खड़े हो ", इसी का जश्न मनाया जाये , 

सफलता - असफलता जो मिले राहों में , 

"स्वीकार कर" , आगे बढ़ा जाय।   


सफर बढ़ रहा रोज़ आगे , 

क्या फर्क पड़ता है - कौन आगे , कौन पीछे 

जहाँ भी ख़त्म हो  सफर अपना  , 

वहाँ एक " शिलालेख " गढ़ जाय।