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Wednesday, January 7, 2026

उसूल

  

दूसरों के लिए होते है उसूल ,

अपने लिये लगते है फ़िजूल ,

दुनिया में सामर्थ्यवान ही सब कुछ है ,

नैतिकता है इनके लिये धूल।

 

कटु सत्य तो ये है ज़माने का ,

पैसे और रुतबे का ही है खेल सारा ,

जपते रहो मानवता का पाठ बराबर ,

वो आयेंगे और बदल देंगे खेल सारा।

 

खेल सारा इस पार और उस पार का है ,

इस पार ज्यादा है , उस पार कम है ,

षड़यंत्र ऐसा , जिसकी कोई थाह नहीं ,

कम वालों का ज्यादा पर नियंत्रण सारा है।

Wednesday, November 26, 2025

पैसा

 

पैसा बहुत जरुरी है ,

नितांत जरुरी है ,

जो कहते है - मोहमाया है ,

ये कहने के लिये भी ,

पल्ले में पैसा जरुरी है। 

 

जो कहते है ,

पैसा सब कुछ नहीं है ,

कपट झूठ बोलते है ,

ऐसा कहने के लिये ,

वो भी पैसा लेते है।

 

अर्थ के बिना ,

जीवन जीना अनर्थ है ,

हाँ , इक बार पैसा आ जाये ,

फिर ज्ञान देने का ,

अलग अर्थ है।  

 

पैसा भले ही शांति ,

सुकून की गारंटी न दे ,

मगर वो सब कुछ दे सकता है ,

जो आज के लिए जरुरी है,

जरुरत पूरी करने के लिये ,

पैसा कमाना मजबूरी हैं। 

Monday, August 25, 2025

सापेक्षिक पंक्तियाँ

 

विकल्प हमेशा से मौजूद है ,

"भाग लो" या "भाग" लो। १। 

 

राय अपनी तभी दो ,

अगला जब मानने को तैयार हो।२।

 

मेहनत करो , खूब करो ,

मगर दीवार खिसकाने में मत करो।३।    

 

ऊंगलीबाजी हर जगह ठीक नहीं ,

अपना गिरहेबां पहले ठीक करो।४।  

 

उम्मीद जायज है किसी से ,

मगर उसके भरोसे ही मत रहो।५। 

 

रिश्ते दो तरफा ही चलते है ,

अकेले हाथ से चुटकी बजाया करो।६।  

 

मेहनत का उम्र से सीधा रिश्ता है ,

जितनी जल्दी कर लो , अच्छा हैं।७। 

 

नेताओं के आपसी रिश्ते "गुप्त " होते है ,

बहकावे में आकर अपने रिश्ते ख़राब न करो।८। 

 

जो दिख रहा है , वही सच नहीं है ,

सोशल मीडिया के दौर में बड़ा झोल है। ९।

 

जेब में धन है , तब तक पूछे यार -रिश्तेदार ,

जेब खाली , पल्ला झाड़े - धन से चल रहा संसार।१०।  

 

वक्त बदल रहा तेजी से , ताल कैसे कोई मिलाये ,

पिछड़ने का खतरा बड़ा , बस सीखते जाइये। ११।

 

 है "ज्ञान" तो जो माँगे उसको दो ,

हर जगह "ज्ञानी " बनने से बचो। १२।  

Saturday, November 19, 2016

बदलाव की बयार ( नोटबंदी )

एक कोशिश हुई कुछ बदलने की , 
जो हम दिल से चाहते हैं !
किसी ने तो पहल की वो दुनिया बनाने की , 
जिसमे हम रहना चाहते हैं !! 

बदलाव की बयार बह रही हैं , 
हमें भी कुछ बदलना होगा !
अपने " आने वाले कल" के लिए,
 " आज " संघर्ष करना होगा !! 

देश आज दोराहे पर खड़ा हैं , 
कोई रास्ता तो चुनना होगा !
या तो ऐसे ही चलते रहो , 
या फिर परिवर्तन का हिस्सा बनना होगा !! 

बेशक अभी परेशानी बहुत हैं , 
हर तरफ हाहाकार हैं !
लोगो के सब्र का ये कड़ा इम्तेहान हैं , 
" देश " के लिए आज यही तो बलिदान हैं !! 

Sunday, December 6, 2009

कागज़ के टुकडो ने बदल दिया इंसान .......

कागज़ के टुकडो ने रुपये , डॉलर में ढल कर !
ज़िन्दगी का सुकून छीन लिया.
सब लग गए हैं उन टुकडो के पीछे , करने उनको जमा,
भूल गए सब नैतिक मूल्य .
भुला दिए सब रिश्ते नाते , वक़्त को ऐसे बदल दिया इन टुकडो ने,
इंसान भूल गया खुद को.
कैसी मारामर मची हैं , कैसा हैं ये हाहाकार ,
इन कागज़ के टुकडो को बना दिया हमने भगवान्.
अब प्रतिष्ठा बन गए हैं ये कागज़ के टुकडो का अम्बार,
अपनी बनायीं ही चीज़ पर अब पछता रहा इंसान.