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Sunday, August 31, 2025

नया वर्ल्ड आर्डर

 मानो तो मोदी है ,

न मानो तो ट्रम्प ,

संशय तो राहुल पर है ,

ज़ेलेन्स्की तो निशाने पर है ही। 

 

पुतिन अटल है , अडिग है ,

शी जिनपिंग खेल रहे गेम नई ,

यूरोप माथा पीट रहा ,

कौन गलत , कौन सही। 

 

अफ्रीका वाले मस्त है ,

देख रहे खेल सभी ,

करेंगे भी क्या वो वर्ल्ड आर्डर से ,

उनके घर के हालात ही सही नहीं। 

 

टैरिफ के चक्कर में ,

दुनिया बनी पड़ी है घनचक्कर ,

जबरदस्ती बॉस बनने पर तुला अमेरिका ,

पिछलग्गू है देश कई। 

 

तय होगा नया वर्ल्ड आर्डर ,

बन रहे है ध्रुव कई ,

बारूद के ढेर पर ,

लग न जाए चिंगारी कहीं। 

Saturday, March 25, 2017

किंकर्तव्यविमूढ़

मेरा देश बड़ी  मुश्किल में हैं , इधर जाये या उधर जाये ! 
बड़ा किंकर्तव्यविमूढ़ सा हैं !! 

विकास की दौड़ में सबसे आगे रहना चाहता है , 
फिर घर की हालात देखकर ठिठक जाता हैं , 

खुशहाल बनने की ललक दिल में हैं , 
किसानों की दशा देखकर सहम जाता हैं , 

बराबरी का हक़ सबको मिले , 
महिलाओ पर होते अत्याचारो से जार जार रोता हैं, 

पूरे विश्व में शांति दूत बनना चाहता हैं , 
पड़ोसियों की हरकतों से बार बार जख्म खाता हैं , 

संताने उसकी मुक्कमल जहां बनाये , 
बढ़ती बेरोजगारी - हथोड़े सा वार करता हैं , 

सबको तरक्की के अवसर मिले , 
भ्रस्टाचार और बेईमानी राह में रोड़ा बनता हैं , 

सर्वधर्म समभाव रहे , 
कुछ लोगो को ये अखरता हैं , 

उम्मीद अभी हैं उसे , 
सदियो से वजूद उसका यूँ ही  कायम नहीं  हैं , 

उठ खड़े होंगे जब ढाई सौ अरब हाथ इक दिन , 
दुनिया में उसके जैसा फिर कोई नहीं हैं।  

Sunday, March 19, 2017

चलो , देश बदलते हैं



चलो , देश बदलते हैं , 
थोड़ा हम और थोड़ा दुसरो को बदलते हैं। 

मंद गति से चल रही विकास यात्रा को , 
आओ ढाई सौ अरब हाथो से थोड़ा धक्का लगाते हैं, 
चलो  , देश बदलते हैं। 

हम सब पहले भारतवासी हैं , 
जात -पात - धर्म- ऊँच - नीच  की राजनीति से थोड़ा ऊपर  उठते हैं , 
चलो , देश बदलते हैं।  

जो पिछड़े , अशिक्षित , गरीब हैं , 
उनको सब मिलकर ऊपर उठाते हैं , 
चलो  , देश बदलते हैं। 

जो जहाँ हैं , वही से शुरू करते हैं , 
अपना काम मेहनत और  ईमानदारी से करते हैं , 
चलो , देश बदलते हैं।  

क़र्ज़ बहुत बड़ा हैं देश का सब पर , 
थोड़ा इस क़र्ज़ को कम करते हैं , 
चलो , देश बदलते हैं।

कराह रही अपनी भारत माता के, 
चेहरे पर मुस्कान लाते हैं , 
चलो , देश बदलते हैं।  

Wednesday, January 4, 2017

देश जगना चाहिये , देश चलना चाहिए

 हर स्तर पर प्रयास होना चाहिए ,
देश आगे बढ़ना चाहिए।  

चलो - उठो - भारत निर्माण करना हैं , 
हर हाथ में काम होना चाहिए।  

वक्त आ गया अब नए भारत का निर्माण करना होगा , 
हर भारतवासी को देश के लिए पहले सोचना होगा।  

अपने पुरखो की सींची धरा पर कर्म बीज बोना होगा , 
आने वाली पीढ़ी के लिए " स्वच्छ और निर्मल" भारत देना होगा।  

जात-पात , धर्म - अधर्म , ऊँच -नीच से ऊपर उठना होगा , 
हरेक नागरिक को अब " भारतीयता " को समझना होगा।  

हिमालय से कन्याकुमारी , कच्छ से अरुणाचल तक अब बिगुल फूँकना होगा , 
"विश्व गुरु " का गौरव फिर से वापस पाना होगा।  

सिंहनाद कर दे सवा अरब भारतवासी जिस दिन , 
दुनिया का कोना कोना थर्रा जायेगा। 

शर्त सिर्फ पहले यह हैं की , 
हमें अपने को अंदर से जगाना  होगा।  

अपनी ऊर्जा , सामर्थ्य और विवेक को , 
देश हित में लगाना होगा।  

हर हाल में अब देश जगना चाहिए , 
"विश्व विजय " की रणभेरी लेकर हर भारतवासी चलना चाहिए।  

Saturday, November 19, 2016

बदलाव की बयार ( नोटबंदी )

एक कोशिश हुई कुछ बदलने की , 
जो हम दिल से चाहते हैं !
किसी ने तो पहल की वो दुनिया बनाने की , 
जिसमे हम रहना चाहते हैं !! 

बदलाव की बयार बह रही हैं , 
हमें भी कुछ बदलना होगा !
अपने " आने वाले कल" के लिए,
 " आज " संघर्ष करना होगा !! 

देश आज दोराहे पर खड़ा हैं , 
कोई रास्ता तो चुनना होगा !
या तो ऐसे ही चलते रहो , 
या फिर परिवर्तन का हिस्सा बनना होगा !! 

बेशक अभी परेशानी बहुत हैं , 
हर तरफ हाहाकार हैं !
लोगो के सब्र का ये कड़ा इम्तेहान हैं , 
" देश " के लिए आज यही तो बलिदान हैं !! 

Tuesday, November 17, 2015

ये हिन्द हैं मेरा ……..



मिटा न सका कोई , मिट गए मिटाने वाले !
बाँट सका न कोई , बँट गए खुद बाँटने वाले !!

हर बार चोट से उभरा था , हैं और रहेगा !
ये हिन्द हैं मेरा , यूँ ही मुस्कराता रहेगा !!

दंश झेले कितने सीने में , वीरो ने गौरव गाथा लिखी हैं !
हम हारे नहीं दुश्मनो से , बस कुछ जयचंदो ने नाक कटाई हैं !!

हम एक थे , हैं और रहेंगे !
ये हिन्द हैं मेरा, सब मिलकर आगे बढ़ेंगे !!

कितनी कोशिशे तुम कर लो जगवालो !
नींव की गहराई  क्या तुम हमारी समझ पाओगे !!

साजिश कर लो कितने ही हमें बरगलाने की !
कुव्वत अभी भी है सिकंदर को घुटने में लाने की !!

ये तो हमारे घर में ही थोड़ा वैचारिक मतभेद हैं , वर्ना मजाल क्या तुम्हारी ? 
ये हिन्द है मेरा , ध्यान रहे  - शेर के मुहँ से भी निवाला निकालने की आदत हैं पुरानी हमारी !!