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Friday, October 3, 2025

जीवन संसार

  

आशा और निराशा के मध्य ,

झूलता रहता है इक मन ,

होनी -अनहोनी की आशंकाएँ ,

चिंतित रहता है  मन ,

समय की मंथर गति में ,

छुपे न जाने कितने राज ,

राजा बने रंक-रंक बने महाराज ,

मन की बेचैनियाँ बहुत ,

इच्छाओं का है अम्बार ,

जिम्मेदारियाँ रीढ़ झुकाये ,

जीवन देखता बस गुबार ,

सुकून को तरसता मन ,

मस्तिष्क करे हुँकार ,

लाभ -हानि के चक्कर में ,

फँसा हुआ जीवन संसार। 

 

पार कैसे लगे ?

बहुत टेड़ा है ये सवाल ,

सबके अपने अपने लक्ष्य ,

सुकून के सबके अपने द्वार ,

समर पल रहा सबके भीतर ,

किसी की जीत , किसी की हार ,

दौड़ में  शामिल सभी,

सबका अपना अपना भाग्य ,

पल -पल जीता जो ,

परवाह नहीं -जीत हो या हार ,

स्वीकार कर हर परिणाम को ,

राग द्वेष सब दरकिनार ,

रिश्ते नातों को देता एक आकार ,

जीवन उसी का समझो - साकार।