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Friday, October 24, 2025

सफ़र

 

सफर तो अकेले का ही है ,

अकेले ही तय करना है ,

मिलते -बिछुड़ते रहेंगे हर मोड़ पर ,

मंज़िल तक पहुँचना अकेले ही है। 

 

मायने बस यह रखता है ,

मिलने -बिछुड़ने वालों से ,

क्या आपने सीखा ,क्या सिखाया ,

क्या यादें दी , क्या यादों का जखीरा बनाया।

Tuesday, November 7, 2017

मुकद्दर



मुकद्दर जागेगा इक दिन , 
मैं मेहनत से क्यों हार मानू।  

मंज़िल मिलेगी इक दिन , 
मैं रोज़ सीढ़ियाँ तो चढ़ूँ।  

समय बदलेगा जरूर इक दिन , 
मैं समय की इज्जत तो करूँ।  

सफलता - असफलता तो परिणाम है कर्मो का , 
चलने से पहले ही इन सबसे क्यों डरूँ।  

कर्मो पर ही मेरा नियंत्रण है , 
सिर्फ किस्मत के सहारे ही क्यों बैठूँ।  

जीवन सिर्फ सेज नहीं फूलो की , 
काँटों से फिर क्यों डरूँ।  

प्रारब्ध जो भी होगा मेरा , 
मैं उस खुदा पर भरोसा तो रखूँ।